मेरे भैया मेरे चंदा मेरे अनमोल रतन.. तेरे बदले में जमाने की कोई चीज न लूं... ये ही वो गीत है जिसे होश संभालने के बाद मैंने सबसे पहले गाना सीखा था। यह कहना है जीएमएसएच 16 की नर्सिंग ऑफिसर परमिंदरजीत थिंड का जो पहली बार राखी पर अपने भाई से दूर रहकर उनके लंबी उम्र की दुआ करेंगी और उन्हें वर्चुअल राखी बांधेंगी।
परमिंदरजीत का कहना है कि आज भी मुझे याद है बचपन के वो दिन जब मैं रक्षाबंधन से बहुत दिन पहले ही अपने भैया हरविंदर सिंह हारिवाल से गिफ्ट के लिए जिद करने लगती थी। वह पापा मम्मी से मिले पॉकेट मनी को बचाकर रखते थे और मुझे हर रखी कुछ न कुछ स्पेशल गिफ्ट देते थे।
परमिंदरजीत ने बताया कि हम दोनों की तकरार और प्यार पूरे परिवार में मनोरंजन का केंद्र रहता था। उनका कहना है कि कोरोना के कारण अब तक की जिंदगी में पहली बार रक्षाबंधन पर अपने भैया की कलाई पर राखी नहीं बांध पाऊंगी। इस बात का मलाल तो है, लेकिन इस बात की खुशी है कि हम दोनों भाई बहन इस समय कोरोना से जंग में मैदान में डटे हुए हैं।