चंडीगढ़ में कोरोना के संक्रमित मरीजों का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। स्थिति यह है कि पहले 100 केस पहुंचने में जहां 47 दिन लगे थे, अब महज तीन दिन में 100 केस आ गए हैं। यह आंकड़े बताने को काफी हैं कि कोरोना के केस कितनी तेजी से बढ़ रहे हैं।
बता दें कि शहर में कोरोना का पहला मरीज 18 मार्च को सामने आया था और अब संक्रमित मरीजों की संख्या 1016 पर पहुंच चुकी है। वहीं, 14 मरीजों की मौत हो गई है जबकि 647 मरीज ठीक हो चुके हैं। 4 मई को कोरोना केसों की संख्या 100 हुई थी। शुरुआती 100 केस 47 दिन में मिले थे।
इसके बाद संक्रमितों की संख्या बढ़ती गई। 19 मार्च को (15 दिन) 200 केस हुए। इसके बाद 2 जून को (14 दिन) 300, 20 जून को (18 दिन) 400, 8 जुलाई को (18 दिन) 500, 14 जुलाई को (6 दिन) 600, 19 जुलाई को (5 दिन) 700, 23 जुलाई को (4 दिन) 800, 27 जुलाई को (4 दिन) 910 और 30 जुलाई (3 दिन) को कुल केसों की संख्या 1016 पहुंच गई। सिर्फ जुलाई के महीने में 570 केस आए हैं और केसों की संख्या 446 से 1016 तक पहुंच गई है।
अनलॉक की प्रक्रिया के बाद बढ़े नए मामले
शहर में कोरोना को मात देने वाले लोगों की संख्या भले बढ़ गई है, लेकिन संक्रमण के फैलाव की गति धीमी नहीं पड़ी है। शहर में अनलॉक का प्रक्रिया जब शुरू हुई तब कुल 318 केस थे, लेकिन इसके बाद नए केसों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ। अनलॉक की प्रक्रिया के दौरान 698 नए केस आए हैं, जबकि 373 मरीज ठीक होकर घर गए।
जुलाई महीने में सबसे ज्यादा केस आए हैं। शहर में व्यावसायिक एवं अन्य गतिविधियां और आवाजाही के बढ़ने के बीच संक्रमण की दर भी बढ़ी है। नाम न छापने की शर्त पर स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चंडीगढ़ में भले ही कोरोना के मरीज ज्यादा आए हैं लेकिन वह सभी कम गंभीर वाले हैं। ज्यादातर मरीजों को कोई लक्षण नहीं है, जिनकी मृत्यु हुई है, वह पहले से कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे।
मई में घटी थी सक्रिय केसों की संख्या, जुलाई के शुरू होते ही बढ़ने लगे केस
22 मई को सक्रिय केसों की संख्या 38 तक पहुंच गई थी। इसके बाद 5 जून को शहर में सिर्फ 31 सक्रिय मामले रह गए थे। जून के पूरे महीने यही स्थिति रही लेकिन 4 जुलाई के बाद सक्रिय केसों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ और 30 जुलाई तक सक्रिय मामले 355 हो गए हैं।
दरअसल, मई महीने में केंद्र सरकार ने अपनी डिस्चॉर्ज पॉलिसी में बदलाव किया था। इसके बाद 13 मई से एक्टिव केसों की संख्या में तेजी से कमी आई। 13 मई तक एक्टिव केसों की संख्या 154 थी, लेकिन अगले ही 9 दिनों में 166 लोग डिस्चॉर्ज हो गए और 22 मई को एक्टिव केसों की संख्या 38 तक पहुंच गई थी।