कोरोना की वजह से चंडीगढ़ के कई बच्चों ने अपने माता-पिता को खो दिया है। ऐसे बच्चों की मदद के लिए प्रशासन ने 'परवरिश' नाम से एक योजना तैयार की है, जिसके तहत प्रभावित बच्चों को रहने-खाने व आर्थिक मदद देने का एलान किया गया है। प्रशासक की मंजूरी के बाद शनिवार को इस बारे में अधिसूचना जारी कर दी गई है।
यूटी प्रशासन के समाज कल्याण एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से यह योजना तैयार की गई है। योजना के तहत जिन बच्चों ने कोरोना के चलते अपने माता-पिता में से एक या दोनों को खो दिया है और वह बाल देखभाल संस्थानों में रह रहे हैं, उनकी शिक्षा, चिकित्सा और पोषण संबंधी खर्च प्रशासन के समाज कल्याण विभाग की तरफ से उठाया जाएगा। इसके अलावा बच्चे के नाम पर तीन लाख रुपये की फिक्स डिपॉजिट (एफडी) भी करवाई जाएगी, जो 21 वर्ष की आयु के बाद मिलेगी।
सरकारी स्कूल में ऐसे बच्चों को निशुल्क शिक्षा प्रदान की जाएगी, जबकि निजी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को भी वार्षिक वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अलावा अगर वह 18 वर्ष के बाद डिप्लोमा कोर्स, ग्रेजुएशन या फिर तीन साल का कोई और डिग्री कोर्स के अलावा प्रोफेशनल डिग्री करते हैं तो भी उन्हें वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
अगर आपके पास है जानकारी तो 0172-2643654 पर करें संपर्क
समाज कल्याण विभाग के सचिव के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से दिए गए आंकड़ों पर जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा ऐसे 800 परिवारों का सर्वे किया जा रहा है, जिन्होंने कोरोना के चलते अपने परिवार के सदस्य खो दिए हैं। अगर किसी व्यक्ति के पास ऐसे किसी बच्चे की जानकारी है तो वह जिला बाल संरक्षण इकाई के हेल्पलाइन नंबर 0172-2643654 पर संपर्क कर सकता है।
प्रशासन के अनुसार ऐसे कई बच्चे हैं, जिन्होंने कोरोना के चलते अपने माता-पिता को खोया है। इसमें कई परिवार ऐसे भी हैं, जिसमें एक ही कमाने वाला था, लेकिन कोरोना के चलते उसकी मृत्यु हो गई। इसलिए ही यह योजना लागू की गई है।