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ट्राइसिटी वासियों ने लिया संकल्प- इस दिवाली जरूरतमंदों की मदद कर मनाएंगे त्योहार

Tue, 03 Nov 2020 02:38 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़/मोहाली/पंचकूला
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ट्राइसिटी वासियों ने लिया संकल्प। - फोटो : अमर उजाला
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कोरोना के कारण कई लोगों का रोजगार छीन गया है। इस दीवाली पर सभी लोग संकल्प लें कि कम से कम एक ऐसे व्यक्ति की मदद कर उसके घर में प्रकाश फैलाएंगे। दीवाली जगमगाते दीपों के साथ मनाने की परंपरा रही है, लेकिन अब पटाखे चलाने की वजह से ध्वनि प्रदूषण तो हो ही रहा, साथ में वातावरण भी दूषित हो रहा है। अब सार्थक दिवाली मनाने का समय आ गया है।

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कोरोना के चलते वैसे भी कई मरीज सांस की तकलीफ से सफर कर रहे हैं, ऐसे वक्त में हम सभी का कर्तव्य बनता है कि इस बार पटाखे न फोड़कर दीपों से त्योहार मनाएं। अमर उजाला अभियान एक युद्ध, पटाखों के विरुद्ध को ट्राइसिटी के लोगों ने काफी सराहा है। आइए जानते हैं क्या कहते हैं ट्राइसिटी के लोग।

खुशी के नाम पर दे रहे हैं परेशानी
हमें पटाखों को फोड़ने की जगह दीप जलाकर दीपावली मनानी चाहिए, ताकि जिससे किसी भी जीव या मनुष्य को कोई परेशानी ना हो। पटाखों से शोर और प्रदूषण जैसी कई समस्या होती है। हम अनजाने में खुशी के नाम पर परेशानी देते हैं। पटाखे ना जलाकर दूसरों को भी प्रेरित करें।  - गोबिंद कुमार, सेक्टर- 13, चंडीगढ़
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वातावरण दूषित करने से बचें
दीपावली खुशियां बांटने का त्योहार है। त्योहारों की आड़ में हमें वातावरण को प्रदूषित नहीं करना चाहिए। इससे हम कई लोगों की जिंदगी बचा सकते हैं। दीपावली के दिन पटाखे ना फोड़कर हमें जहरीले धुएं को वातावरण में फैलने से रोकना चाहिए। साफ वातावरण हमारे साथ साथ हमारे परिवार के लिए भी बेहतर होगा। - रोशनी राय, सेक्टर 43, चंडीगढ़

पटाखों से पशु-पक्षियों को पहुंचता है नुकसान
पटाखे जलाकर हम ध्वनि और वायु दो तरह का प्रदूषण फैलाते हैं। इससे पशु-पक्षियों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। एक तो वह पटाखों की आवाज से डरते हैं और दूसरी तरफ फेफड़े छोटे होने के कारण धुएं से वह बीमारियों का शिकार होते हैं। पशु पक्षियों की सुरक्षा के लिए हमें आगे आकर लोगों को पटाखे ना जलाने के प्रति जागरूक करना चाहिए। -महिमा, पंचकूला

पटाखों न फोड़कर जरूरतमंदों की करें मदद
पटाखे जलाकर हम प्रकृति को ही नुकसान पहुंचा रहे हैं। हमें पटाखों पर पैसे व्यर्थ ना कर उन जरूरतमंद बच्चों की सहायता करनी चाहिए जो अपनी पढ़ाई के लिए पैसे नहीं जुटा पाते। कोरोना के कारण जिन लोगों का रोजगार छूट गया है हमें इन पैसों से ऐसे लोगों की सहायता करनी चाहिए। हमें सुरक्षित दिवाली मनाने चाहिए। -अंबिका, सेक्टर- 26, चंडीगढ़

परंपरा मत छोड़िये.. दीये जलाकर दिवाली मनाइए
बाजार में इलेक्ट्रॉनिक चीजें आने से दीये की मांग कम हो गई है। लोग दीये जलाने की बजाय लाइटिंग का प्रयोग करने लगे हैं। इससे हम अपनी परंपरा को पीछे छोड़ रहे हैं। लाइटिंग प्रयोग होने के कारण अब कुम्हारों ने भी दीये बनाने कम कर दिए हैं। एक दिन ऐसा आएगा जब दीये ही बनने बंद हो जाएंगे, जिसके जिम्मेदार हम होंगे। - सुष्मिता, सेक्टर- 26, चंडीगढ़

शोर की बजाय सार्थक दिवाली मनाएं
दीवाली के दिन आग लगने की दुर्घटनाएं होती हैं। बच्चों के हाथ भी जल जाते हैं। जिस चीज से बच्चों, मरीजों, गर्भवती महिलाओं और पशु पक्षियों को नुकसान होता है, हमें उस चीज को त्याग देना चाहिए। शोर-शराबा करने की बजाय हमें प्यार से त्योहार मनाना चाहिए। इससे हम बिजली की बचत के साथ अपनी परंपरा को भी कायम रख सकते हैं। -आदित्य, सेक्टर- 28, चंडीगढ़

परिवार के साथ मनाएं दिवाली
कोराना के चलते इस बार पटाखे फोड़ने से परहेज करें क्योंकि इससे पर्यावरण दूषित होता है। हवा में भारी मात्रा में धुआं होने से स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ने की संभावना रहती है। हर वर्ग के लोगों को दिवाली का त्योहार अपने परिवार के साथ घर पर मनाना चाहिए। सभी से ईको फ्रेंडली दीपावली मनानी चाहिए। - नैब चौधरी, समाज सेवी, कालका। 

पटाखों का धुआ खतरनाक
मुझे पटाखों का शोर व धुआं पसंद नहीं है। इनसे निकलने वाला धुआं जहरीली गैस पैदा करता है। हजारों रुपये पटाखों पर खर्च करने की जगह मैं प्रत्येक दिवाली पर अपने दोस्तों व परिवार के सदस्यों के साथ जरूरतमंदों की मिठाई व गिफ्ट बांटने का काम करता हूं। मैं अपने दोस्तों को भी इसके लिए प्रेरित करता हूं। -एडवोकेट विकास अग्रवाल, कालका।
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ईको फ्रेंडली दिवाली मनाएं
दिवाली पर किसी भी तरह का प्रदूषण न फैले। इसलिए त्योहार को ईको फ्रेंडली के तौर पर मनाएं। पटाखे चलाने से पर्यावरण दूषित होता है व ध्वनि प्रदूषण भी होता है, इसलिए पटाखे चलाने से परहेज करें। खुशी के इस अवसर पर घर में मिट्टी से बने दीये जलाएं। रंगोली बनाने के लिए जैविक रंगों का प्रयोग करें। - लाल लांबा, जिला कार्यकारिणी सदस्य, भाजपा, कालका- पिंजौर।

कोरोना मरीज को भी मिलेगी राहत
ऐसे कई मरीज हैं, जिनका अभी भी कोरोना का इलाज चल रहा है। कोरोना में लोगों को सांस लेने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में दीपावली पर पटाखे बजाने से बचना चाहिए। पटाखे की वजह निकलने वाली ध्वनि प्रदूषण से पशु पक्षियों को भी दिक्कत है। इस बार का पटाखे नहीं चलाने का संकल्प लिया है।  -शुभम अरोड़ा, कालका- पिंजौर।

पटाखे ना चलाने का देंगे संदेश
दिवाली पर लोगों को पटाखे ना चलाने का संदेश देंगे ताकि पटाखों की वजह से होने वाले वायु प्रदूषण से बचा जा सके। मेरी तरह बाकी सब लोग भी पटाखे ना चलाने की शपथ लें। मैं अपने दोस्तों से भी यही अपील करता हूं कि घर के बाहर दीये जलाकर दीपावली मनाएं और जितना हो सके लोगों को पटाखे ना चलाने के लिए प्रेरित करें। - राहुल पवार, विद्यार्थी।

बिना पटाखे मनाऊंगा दिवाली
पर्यावरण हितैषी दिवाली मनाने को लेकर मैं बिल्कुल तैयार हूं। इस बार मैं दिवाली बिना पटाखों के मनाऊंगा। मुझे दिवाली पर पटाखे चलाना जरा भी अच्छा नहीं लगता है, इसलिए पटाखों पर पैसे खर्च करने की बजाय जरूरतमंदों को राशन सामग्री बांटकर उनकी मदद करनी चाहिए। मेरे साथ-साथ परिवार के बाकी सदस्यों ने भी पटाखे ना चलाने का संकल्प लिया है। - देव केहर सिंह, विद्यार्थी।
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