चंडीगढ़। कोरोना के संदिग्ध मरीजों के जांच का नमूना लेने वाले कर्मचारी संक्रमण के साए में काम करने को मजबूर हैं। सेक्टर-45 स्थित सिविल अस्पताल में नमूना इकट्ठा करने वाली टीम टीन शेड के नीचे पीपीई किट में कई घंटे लगातार ड्यूटी कर रही है। यहां पर मरीजों को गर्मी से बचाने के लिए टीन शेड में टूटा हुआ पंखा बांधकर काम चलाया जा रहा है। वहीं, कर्मचारी अपनी परेशानी दरकिनार कर नमूना ले रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि जान जोखिम में डालकर काम करने वाले कर्मचारियों को समय से वेतन तक नहीं मिल रहा। बता दें कि सात मोबाइल टीमों के अलावा मनीमाजरा, सेक्टर-22 व 45 के सिविल अस्पताल में संविदा पर रखे गए लैब टेक्नीशियन कोरोना के संदिग्धों का नमूना ले रहे हैं। उधर, स्वास्थ्य निदेशक डॉ. अमनदीप कंग ने कहा है कि पीपीई किट में ज्यादा देर तक नमूना लेने वाले कर्मचारियों को राहत देने के लिए टीम की संख्या बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है, ताकि एक कर्मचारी एक घंटे नमूना लेने के बाद 2 घंटे आराम कर सके।
बिना वेतन कर रहे ड्यूटी
कोरोना के संदिग्धों का नमूना ले रहे 50 लैब टेक्नीशियन को अब तक मार्च महीने का वेतन नहीं मिला है। इस संदर्भ में स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि ठेकेदार की लापरवाही पर उसे हटा दिया गया है, जिससे वेतन की प्रक्रिया में विलंब हो रहा है। नया ठेकेदार आने तक स्वास्थ्य विभाग अपने मद से इन कर्मचारियों को वेतन देने की योजना बना रहा है।
एसी बस की योजना भी ठंडे बस्ते में
ठंड के मौसम में कर्मचारी खुले में नमूना ले रहे थे, लेकिन गर्मी बढ़ते ही उनकी परेशानी बढ़ गई। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने एक महीने पहले कोरोना जांच के नमूने लेने वाली टीम के लिए सीटीयू से एसी बस लेने की योजना बनाई थी, लेकिन योजना ठंडे बस्ते में चली गई। अधिकारियों की मानें तो एसी बस का प्रयोग नमूना लेने वाली टीम को राहत देने के लिए किया जाना था, ताकि वे सभी कागजी काम एसी बस के अंदर करें और सिर्फ नमूना लेने के लिए बाहर आएं।
चार घंटे में डिहाइड्रेशन व बेहोशी का खतरा
कोरोना के संदिग्ध मरीजों का नमूना लेने वाले लैब टेक्नीशियन 3 से 4 घंटे पीपीई किट में ड्यूटी दे रहे हैं। तेज धूप में टीन शेड के नीचे पीपीई किट में ड्यूटी कर रहे कर्मचारियों को डिहाइड्रेशन और चक्कर आने जैसी परेशानियां होने लगी हैं। उनके परिजन भी चिंतित हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी
कोरोना के संदिग्ध मरीजों का नमूना लेने वाले कर्मचारियों के वेतन में विलंब का कारण ठेकेदार बदला जाना है। इसे लेकर सोमवार को यूटी प्रशासक के सलाहकार मनोज परिदा के पास फाइल भेजी जाएगी। इसमें नया ठेकेदार लगाने के बारे में लिखा गया है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग की ओर से कर्मचारियों को वेतन देने की अनुमति मांगी गई है। दो से तीन दिन में वेतन की समस्या का समाधान निकाल लिया जाएगा। -डॉ. अमनदीप कंग, स्वास्थ्य निदेशक