पीपीई किट न पहनने का कहीं ये कारण तो नहीं
पीपीई किट पहनने के बाद लगातार आठ घंटे तक व्यक्ति खाने या पीने की चीजों से दूर रहता है। शौचालय भी नहीं जा पाता है। मोबाइल समेत अन्य रोजाना के उपकरणों का भी प्रयोग नहीं कर पाता है। जब ड्यूटी पूरी होती है, तब वह सैनिटाइजेशन रूम में जाकर पीपीई किट को उतारकर कचरे के डब्बे में फेंकता है और फिर सामान्य दिनचर्या कर पाता है।
इसलिए जरूरी है मानकों का पालन
पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट प्रोटेक्टिव गियर्स हैं जिन्हें कोरोना वायरस पीड़ितों का इलाज कर रहे डॉक्टरों और नर्स को सुरक्षित रखने के लिए डिजाइन किया गया है। इन गियर्स को पहनने से डॉक्टर्स वायरस के संपर्क में आने से खुद को अधिक से अधिक बचा पाते हैं। पीपीई किट में चश्मे, फेस शील्ड, मास्क, ग्लव्स, गाउन, हेड कवर और शू कवर शामिल होते हैं जिससे सिर से पैर तक का प्रत्येक हिस्सा सुरक्षित हो जाता है।
कोविड वार्ड में ड्यूटी कर रहे डॉक्टर और सभी अन्य कर्मचारी अब भी बचाव के सभी मानकों का शत प्रतिशत पालन करते हुए वहां ड्यूटी कर रहे हैं। - डॉ. सुमन सिंह, निदेशक स्वास्थ्य
लगभग ढाई साल से यह लगातार देखने में आ रहा है कि कभी कोविड केस बढ़ने लगते हैं तो कभी कम हो जाते हैं। यह मानना कि संक्रमण का खतरा टल गया है, पूरी तरह से गलत है। मेरा मानना है कि कोरोना योद्धा कहे जाने वाले डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ को एन-95 मास्क, पीपीई किट और बचाव के अन्य मानकों के पालन में कोई लापरवाही नहीं करनी चाहिए। एक छोटी सी लापरवाही से उनका और उनके परिवार का स्वास्थ्य खतरे में पड़ सकता है। - डॉ. विवेक मल्होत्रा, सचिव आईएमए