26 हजार करोड़ रुपये के सालाना टर्नओवर वाली ट्राइसिटी की इंडस्ट्री को लॉकडाउन ने एकदम पीछे धकेल दिया है। दो माह बाद इंडस्ट्री में प्रोडक्शन शुरू भी हुआ तो अब हालात एकदम बदले हुए हैं। अब आर्डर चालीस फीसदी रह गए हैं और फाइनेंशियल दिक्कतें सौ फीसदी सामने खड़ी हैं। ऐसे में भी इंडस्ट्री की आशाएं खत्म नहीं हुई हैं। उम्मीद है कि छह माह में
हालात सामान्य हो जाएंगे।
मोहाली, पंचकूला और चंडीगढ़ में इंडस्ट्री खुल तो रही हैं पर प्रोडक्शन एकदम कम हो रहा है। जिला मोहाली में करीब दस हजार इंडस्ट्री हैं, वहीं चंडीगढ़ में करीब 1700 इंडस्ट्री हैं और इतनी ही इंडस्ट्री पंचकूला में भी है। उद्यमियों की मानें तो लॉकडाउन के दौरान मेडिकल इंडस्ट्री को छोड़कर ट्राइसिटी की इंडस्ट्री को पच्चीस सौ करोड़ की चपत लग चुकी है।
सबसे ज्यादा आटो इंडस्ट्री
मोहाली, पंचकूला और चंडीगढ़ में सबसे ज्यादा आटो पार्ट्स की इंडस्ट्री हैं। लॉकडाउन के कारण इस इंडस्ट्री को सबसे ज्यादा घाटा हुआ है। इसकी वजह है कि इस इंडस्ट्री का सारा धंधा एक्सपोर्ट पर है। ज्यादातर आटो कंपोनेंट विदेश में भेजे जाते हैं। अब आटो इंडस्ट्री के उद्यमियों की मानें तो जब तक इंटरनेशनल ट्रेड नहीं शुरू होगा इंडस्ट्री की हालत खराब ही रहने वाली है।
फर्नीचर का भी धंधा चौपट
फर्नीचर इंडस्ट्री का हब माने जाने वाले पंचकूला के उद्यमियों के अऩुसार यहां फर्नीचर इंडस्ट्री का ही सालाना टर्नओवर एक हजार करोड़ से ज्यादा का था। हालांकि लॉकडाउन के पहले भी इंडस्ट्री का हाल खराब ही था लेकिन लॉकडाउन के बाद तो सारा धंधा ही चौपट है। इसकी वजह है कि रियल एस्टेट सेक्टर। इसमें अभी काम तेजी से नहीं चल रहा है।
रेलवे पार्ट्स के आर्डर आधे
अब रेलवे पार्टस की इंडस्ट्री से जुड़े उद्यमियों के आर्डर घटकर चालीस फीसदी तक ही रह गए हैं। पहले सारे आर्डर सरकारी होते थे। लॉकडाउन के कारण पार्ट्स की डिमांड खत्म हो गई है। इसके साथ ही यह इंडस्ट्री भी एक्सपोर्ट से जुड़ी है लेकिन अभी इंटरनेशनल लेवल पर आर्डर नहीं हैं। इसके कारण काम काफी कम हो चुका है।
लेबर भी है बड़ी समस्या
इंडस्ट्री की सबसे बड़ी समस्या लेबर है। पंचकूला, चंडीगढ़ और मोहाली से मजदूरों के पलायन की वजह से इंडस्ट्री के लिए मुश्किल बढ़ चुकी हैं। अहम बात यह है कि जो लेबर यहां से गई वह टेक्निकल लेबर थी। इसकी वजह से उद्यमियों को सीमित लेबर से ही काम चलाना पड़ रहा है। हरेक इंडस्ट्री को समस्या आ रही है। चाहे वह फर्नीचर हो या फिर रेलवे पार्ट्स या आटो इंडस्ट्री।
जिला मोहाली
कुल इंडस्ट्री-दस हजार
सालाना टर्नओवर-पंद्रह हजार करोड़
मुख्य इंडस्ट्री-आटो कंपोनेंट, ट्रैक्टर पार्ट्स, रेलवे पार्ट्स।
जिला पंचकूला
कुल इंडस्ट्री 1700
सालाना टर्नओवर पांच हजार करोड़
मुख्य इंडस्ट्री पैकेजिंग, फर्नीचर, रेलवे पार्ट्स, आटो कंपोनेंट, मेडिकल।
चंडीगढ़
कुल इंडस्ट्री 1700
सालाना टर्नओवर छह हजार करोड़
मुख्य इंडस्ट्री नट बोल्ट, रेलवे पार्ट्स, स्टील फर्नीचर, ट्रैक्टर
पार्टस, पैकेजिंग।
मेरा रेलवे पार्ट्स का काम है। लॉकडाउन के बाद हमारे आर्डर चालीस फीसदी ही रह गए। अब लेबर भी चली गई है। ऐसी स्थिति में हमारे लिए मुश्किल हो गई है। इंडस्ट्री तभी बेहतर होगी जबकि एक्सपोर्ट शुरू होगा। देश में अभी पूरी तरह से लाकडाउन नहीं खुला है। जिसकी वजह से हमें समस्या आ रही है।
- नवीन मंगलानी, प्रेसीडेंट, चैंबर ऑफ चंडीगढ़ इंडस्ट्री
मेरी फर्नीचर इंडस्ट्री है। हमारा ज्यादातर काम होटल, रियल एस्टेट और होम डेकोर के साथ चलता है। अभी सभी सेक्टरों की हालत खराब है। ऐसी स्थिति में फर्नीचर इंडस्ट्री कैसे चलेगी। लॉकडाउन के बाद तो आर्डर एकदम कम हो गए। अभी इंडस्ट्री में आत्मविश्वास आने में समय लगेगा।
- राकेश गर्ग, महासचिव, इंडस्ट्री एसोसिएशन पंचकूला
जिला मोहाली में करीब दस हजार इंडस्ट्री हैं। वास्तव में इंडस्ट्री एक दूसरे से जुड़ी हैं। एक सेक्टर खुला है और दूसरा बंद तो इंडस्ट्री की ग्रोथ नहीं होगी। अभी यही हाल है। आटो इंडस्ट्री आटो के बाजार पर निर्भर है और वही बाजार नहीं चल रहा है तो कैसे काम होगा। हमको लॉकडाउन के दौरान जबरदस्त चपत लगी है।
- योगेश सागर, प्रेसीडेंट, मोहाली इंडस्ट्री एसोसिएशन