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'लोगों को भूख से तड़पते देखकर समाजसेवा करने लगा, मुझे अब नहीं लगता कोरोना से डर'

Tue, 16 Jun 2020 02:45 PM IST
खुशबू गोयल संवाद न्यूज एजेंसी, नयागांव(चंडीगढ़)
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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शुरू-शुरू में जब कोरोना महामारी का नाम सुना था। तब सामने किसी को भी देखकर काफी डर लगता था। कहीं सामने वाला व्यक्ति कोरोना से संक्रमित तो नहीं है। उसके बाद जैसे-जैसे लॉकडाउन बढ़ने से किराए के मकानों और झुग्गियों में रहने वाले लोग खाने के लिए भूख से प्रभावित होने लगे। उस समय उनकी भूख के सामने ये डर काफी छोटा दिखाई देने लगा।
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यह कहना है नायब तहसीलदार जसकरण सिंह बराड़ का। जो कि कोरोना काल में लगातार करीब पौने तीन महीनों से कोरोना महामारी में समाजसेवा में जुटे हुए हैं। जसकरण सिंह ने बताया कि इस महामारी के दौरान उन्हें 14-15 घंटे काम करना पड़ता था। कोशिश यहीं रहती थी कि कोई व्यक्ति भूखा न रह जाए।

हालांकि इसके बाद शिकायत आने के बाद क्रॉस चेकिंग करनी पड़ती थी। क्योंकि कई बार ऐसे लोग भी राशन की डिमांड करते थे। जो आर्थिक तौर पर कमजोर नहीं थे। नायब तहसीलदार जसकरण सिंह बराड़ का कहना है कि इंसानियत मेरा धर्म है। पूजा पाठ की बातों से पहले अपने कर्म करने पर विश्वास रखता हूं।
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उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश यहीं रहती है कि कोई परेशान न हो। उन्होंने प्रवासी लोगों को उनके घरों में भेजने से लेकर अन्य लोगों की समस्याओं को अपनी समस्याओं की तरह लिया। इसके बाद काम किया। जिससे मुझे काम को अच्छे से करने में कामयाबी मिली।
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बाहर से आकर परिवार से मिलने से पहले यह काम करने नहीं भूलते

नायब तहसीलदार जसकरण सिंह बराड़ का कहना है कि कोरोना ने उनकी ही नहीं सभी लोगों की जिंदगी काफी हद तक बदल दी है। पहले की तरह वह अपने परिवार को समय तक नहीं दे पा रहे हैं। बाहर से आकर घर में प्रवेश करने से पहले ही जूते बाहर उतार देते थे। इसके बाद पानी में डिटोल डालकर अच्छी तरह से नहा धोकर परिवार से मिलते हैं। उन्होंने कहा कि अभी भी मामला गंभीर है। क्योंकि कोरोना से बचने के लिए खुद भी गाइडलाइन का पालन करते हैं। इसके साथ ही लोगों से उम्मीद है कि सभी नियमों का पालन करें, तभी हम सब कोरोना को मात दे पाएंगे।

बच्चों ने की सेविंग से जुटाए पैसों से मदद
नायब तहसीलदार जसकरण सिंह ने कहा कि उनके छठी कक्षा और दसवीं कक्षा में पढ़ने वाले दोनों बेटों ने भी जेब खर्चे के बचाए पैसों से कोरोना पीड़ितों की मदद में सहयोग दिया। उन्होंने 10 हजार राशन किट और रोजाना 5 हजार गरीब लोगों तक लंगर पहुंचाने और साथ में पांच बीमार लोगों के महंगे टेस्ट भी करवाए हैं। दो हजार लद्दाखी विद्यार्थियों को उनके घर जाने में भी मदद की। नयागांव, सिंघा देवी, टुंडा, टांडी, मसौल और माजरी सहित कई अन्य गांव में 10 हजार राशन की किट खुद जाकर जरूरतमंदा लोगों में बांटी है।
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