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कोरोना ने अस्पतालों में कर दी खून की कमी, नॉन कोविड मरीजों के इलाज में आ रही बाधा

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चंडीगढ़। कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रकोप से एक बार फिर ब्लड बैंकों में खून की कमी होने लगी है। स्थिति यह है कि ओपीडी बंद होने के बावजूद इमरजेंसी और ट्रामा में आने वाले मरीजों को प्रतिदिन 500 से 1000 यूनिट खून की जरूरत पड़ रही है, लेकिन रक्तदाताओं की कम होती संख्या के कारण सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता माने जाने वाला पीजीआई दो सौ से ढाई सौ यूनिट खून की आपूर्ति कर पा रहा है। हालत यह है कि पीजीआई प्रशासन मरीजों की जान बचाने के लिए युवाओं से रक्तदान करने की अपील कर रहा है, क्योंकि खून की कमी के कारण कैंसर, थैलेसीमिया और ऐसे ही अन्य गंभीर बीमारियों के मरीजों का इलाज प्रभावित होने लगा है। स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि एक एक यूनिट खून की तलाश में मरीजों के परिजन संक्रमण के खतरे के बीच इस अस्पताल से उस अस्पताल का चक्कर काट रहे हैं।
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10 प्रतिशत अन्य अस्पतालों को
पीजीआई ब्लड बैंक से 2020 और 2021 में डेढ़ लाख से ज्यादा यूनिट खून का संग्रह कर उसे जांच के बाद मरीजों के इलाज के लिए दिया जा चुका है। पीजीआई ब्लड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन के प्रमुख प्रो. रतिराम शर्मा ने बताया कि कोरोना की पहली व दूसरी लहर के दौरान भी रक्तदान की प्रक्रिया नहीं थमी। महामारी के दौर में भी लगभग डेढ़ लाख यूनिट खून एकत्रित कर उसे पीजीआई के अलावा उसमें से 10 प्रतिशत स्टॉक अन्य सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के इलाज के लिए दिया गया है।
संस्थाओं का मिल रहा भरपूर साथ
प्रो. रतिराम शर्मा ने बताया कि लगभग 200 से ज्यादा संस्थाएं रक्तदान शिविर के माध्यम से पीजीआई को खून उपलब्ध करा रही हैं। उनमें से कुछ संस्थाएं जैसे श्री शिव कांवड़ महासंघ चैरिटेबल ट्रस्ट व महामाई मनसा देवी चैरिटेबल भंडारा कमेटी अकेले आठ से 10 हजार यूनिट खून पीजीआई को दे रही हैं। कोविड के दौरान भी उनका रक्तदान का नियमित सिलसिला थमा नहीं है। संस्था के सदस्यों ने अपनी जान की परवाह किए बिना लगातार रक्तदान शिविर आयोजित किए हैं।
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आज पीजीआई में करें रक्तदान
थैलेसीमिक चैरिटेबल ट्रस्ट और पीजीआई पुलिस पोस्ट की ओर से व अमर उजाला फाउंडेशन के सहयोग से सोमवार को पीजीआई के जाकिर हॉल में रक्तदान शिविर लगाया गया है। यहां सुबह 10 से दोपहर 3 बजे तक आकर रक्तदान किया जा सकता है। शिविर को सफल बनाने में सुख फाउंडेशन भी सहयोग करेगा।
इन मरीजों का इलाज हो रहा प्रभावित
ब्लड बैंक में खून की कमी के कारण सर्जरी, कैंसर, थैलेसीमिया, हीमोफीलिया, एनीमिया, बर्न और गर्भवती महिलाओं के इलाज में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
तीसरी लहर के शुरुआती दौर में ही स्थिति खराब होने लगी है। रक्तदाताओं को मरीजों की जान बचाने के लिए पहले की तरह ही आगे आना होगा, ताकि खून की कमी को दूर किया जा सके।
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-प्रो. रति राम शर्मा, पीजीआई ब्लड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन के प्रमुख
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