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सरिता और उनके परिवार की हिम्मत के आगे कोरोना ने भी घुटने टेके

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चंडीगढ़। कोरोना महामारी के इस दौर में जब लोग खुद को संक्रमण से बचाने के लिए घरों में कैद हैं, तब सरिता छाबड़ा और उनके परिवार के आधे से ज्यादा सदस्य कोरोना से मोर्चा ले रहे हैं। पीजीआई में नर्सिंग ऑफिसर के पद पर तैनात सरिता लगातार तीन महीने से कोविड- आईसीयू, इमरजेंसी में ड्यूटी कर रही हैं। ड्यूटी के कारण वह अक्टूबर के बाद से अपने परिवार के किसी सदस्य से मिल नहीं पाई हैं।
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सरिता के साथ ही उनकी बड़ी बहन सरोज रोहतक मेडिकल कॉलेज में नर्सिंग ऑफिसर और एक बहन यमुनानगर में एएनएम के पद पर ड्यूटी कर रही हैं। वही भाई राजन पंचकूला सिविल अस्पताल में टेक्नीशियन और भाभी नर्सिंग स्टाफ के पद पर कार्यरत हैं। इतना ही नहीं उनकी बहन सुमन दिल्ली तिहाड़ जेल में डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस के पद पर कार्यरत हैं। सरिता की मां कौशल्या का कहना है कि भगवान ने मुझे 8 बेटियों और एक बेटे के रूप में नौ शक्तियों से नवाजा है। कोरोना महामारी के इस दौर में मेरे बच्चे जांबाज सिपाही के रूप में मैदान में डटे हुए हैं। मेरा आशीर्वाद और विश्वास यह कहता है कि जीत हमारी होगी।
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डरना नहीं जीतना सीखा है
सरिता का कहना है कि परिवार में ज्यादातर लोग स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े हुए हैं। ऐसी स्थिति में बीमारी और संक्रमण होने का खतरा कभी उन्हें महसूस ही नहीं नहीं हुआ। सरिता ने बताया कि उनकी बहनों और भाई ने बचपन से ही हमेशा जीतना सीखा है। सविता अपने भाई बहनों में सबकी चहेती हैं। उनका कहना है कि मां के साथ ही भाई और सभी बहनों का प्यार उन्हें हमेशा से सबसे ज्यादा मिला है। उनके प्यार के बल पर वह अकेले रहते हुए भी कभी कमजोर नहीं पड़ी। सरिता पीजीआई के हॉस्टल में रहती हैं।
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जब अकेलापन का अहसास हुआ सबको पास पाया
सरिता ने बताया कि पिता के निधन के बाद माता ने अकेले ही उनका और उनके पूरे परिवार का पालन पोषण किया है। मां की हिम्मत और हौसले को देखकर उन्हें और उनके बहनों को ताकत मिला। इसके बल पर उन्होंने खुद को आत्मनिर्भर बनाने का निर्णय लिया। मां के प्यार और आशीर्वाद के बल पर ही वो और उनके भाई आज आत्मनिर्भर होकर कोरोना से जंग में एक योद्धा के रूप में डटे हुए हैं। जब कभी खुद को अकेला महसूस करती हैं अपने परिवार को आसपास महसूस करती हैं। सरिता का कहना है कि खुद को लड़की समझकर लड़कों से कमतर आंकने की गलती कभी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि हिम्मत और विश्वास के बल पर वह भी अपनी भाई की ही तरह कोरोना से मोर्चा ले रही हैं।
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