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कोरोना के चलते विद्यार्थियों का शोध प्रभावित, मदद करने की बजाय पीयू लगा रहा फाइन

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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी में कोरोना महामारी के कारण पिछले एक वर्ष से अधिक समय से विद्यार्थियों का शोध कार्य प्रभावित हो रहा है। पीयू विद्यार्थियों की मदद करने की बजाय शोध कार्य में अतिरिक्त समय की मांग करने वाले विद्यार्थियों से अतिरिक्त शुल्क (फाइन) वसूल रहा है। विद्यार्थियों का कहना है कि पहले लगभग सात से आठ महीने यूनिवर्सिटी पूरी तरह बंद रही। इसके बाद कुछ पाबंदियों के साथ विभाग खोले गए। इस महीने फिर प्रयोगशालाएं और पुस्तकालय बंद कर दी गईं। बिना संसाधनों के विद्यार्थी शोध कार्य कैसे करें। ऐसे में विद्यार्थी तनाव में हैं।
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शोधार्थियों ने कहा कि यूनिवर्सिटी शोधार्थियों के हित में फैसले लेने में नाकाम रही है। परेशानियां सुनने की बजाय उनसे शोध के समय में विस्तार की मांग करने वाले विद्यार्थियों से अतिरिक्त शुल्क मांगा जा रहा है। आर्ट्स विभाग के शोधार्थी यूनिवर्सिटी लाइब्रेरी बंद होने के कारण किताबों और शोध जर्नल के अभाव में पिछले वर्ष अपना काम नहीं कर सके, क्योंकि ऑनलाइन सभी जर्नल और किताबें उपलब्ध नहीं थी और कुछ की कीमत बहुत अधिक थी।
क्या कहते हैं शोधार्थी
विज्ञान विद्यार्थियों के सैंपल हो रहे खराब
कोरोना महामारी के कारण पहले लगभग सात-आठ महीने प्रयोगशालाएं बंद रहीं। इसके बाद अब फिर एक माह के लिए यूनिवर्सिटी ने बंद कर दी है। 31 मई के बाद का भी कुछ निश्चित नहीं है कि प्रयोगशालाएं खोली जाएगी या नहीं। विज्ञान के विद्यार्थियों का पीएचडी का आधे से ज्यादा काम प्रयोगशाला में होता हैं। वहीं हमें अपने शोध के सैंपल की निगरानी भी करनी पड़ती है। अब ऐसे बीच में अचानक प्रयोगशाला बंद होने के कारण सैंपल खराब हो रहे हैं। हमें शुरुआत से प्रैक्टिकल शुरू करने की नौबत आ रही है। ऐसे में यूनिवर्सिटी कोविड के समय को जीरो वर्ष में गिनने की बजाय अतिरिक्त समय की मांग करने वाले शोधकर्ताओं से फाइन मांग रही हैं। - प्रिया , शोधकर्ता रसायन विभाग, पांचवां वर्ष
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शोध में संसद की लाइब्रेरी की जरूरत, नहीं हो पा रहा काम
मेरा फील्ड काम पिछले वर्ष में बहुत प्रभावित हुआ है। मेरा शोध कार्य राजनीति में दिव्यांगों की भूमिका पर आधारित है। इसमें मुझे यूनिवर्सिटी लाइब्रेरी के साथ संसद की लाइब्रेरी की जरूरत है, लेकिन दोनों बंद होने के कारण काम नहीं हो पा रहा है। पिछले एक वर्ष में यूनिवर्सिटी की ओर से शोधार्थियों को कोई सुविधा भी नहीं दी गई है, छात्रावास भी बंद थे। इस कारण हम यूनिवर्सिटी के विभाग और लाइब्रेरी का भी इस्तेमाल नहीं कर पाए। ऑनलाइन सभी शोध जर्नल और किताबें नहीं मिलती है। - धीरू, शोधकर्ता ह्यूमन राइट्स, द्वितीय वर्ष
किताब उपलब्ध नहीं हो पा रही, कैसे करें शोध
आर्ट्स विभाग के शोधकर्ताओं का काम बिना लाइब्रेरी के संभव ही नहीं है, क्योंकि हमें बहुत सारी किताबें पढ़नी पड़ती हैं। ऑनलाइन सभी किताबें नहीं मिलती हैं। इसके अतिरिक्त पिछले वर्ष विभाग भी बंद थे। इसके कारण भी बहुत काम प्रभावित हुआ। अब यूनिवर्सिटी शोध कार्य में अतिरिक्त समय की मांग करने वाले विद्यार्थियों से फाइन मांग रही है। इस कारण विद्यार्थी तनाव में हैं। हमारी मांग है कि यूनिवर्सिटी पिछले वर्ष को जीरो वर्ष में माने। जिससे विद्यार्थियों को थोड़ी राहत मिल सके और वो अपनी शोध आसानी से सही ढंग से पूरी कर पाए। - संदीप, शोधकर्ता पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, छठा वर्ष
विभागों और प्रशासन के बीच तालमेल की कमी
यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक ब्लॉक के अधिकारियों और विभिन्न विभागों में आपसी तालमेल की कमी का खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। मेरा पिछले वर्ष सिर्फ लिखित कार्य बचा था, इसलिए घर बैठकर उसे पूरा किया, लेकिन मेरे बहुत से दोस्तों शोध में देरी के कारण यूनिवर्सिटी को अतिरिक्त शुल्क दे रहे हैं। हालांकि प्रशासनिक ब्लॉक ने नोटिस जारी किया था कि पिछले वर्ष को जीरो वर्ष माना जाए, लेकिन यूनिवर्सिटी ने अभी अपने विभागों में इसको लागू नहीं किया है। इस कारण विद्यार्थी मानसिक तौर पर परेशान हो रहे हैं। - भूपिंदर बाठ, शोधकर्ता वीमन स्टडीज, पांचवां वर्ष
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