रेलवे की तर्ज पर पंजाब रोडवेज की ओर से राज्य के बस अड्डों पर कुलियों की उपस्थिति अनिवार्य करने के बावजूद उन्हें कोई न्यूनतम वेतन नहीं मिल रहा है।
उधर, रेल विभाग कुलियों को चौथा दर्जा कर्मचारी मानकर न्यूनतम वेतन देती है। इसी कारण अब पंजाब रोडवेज कुली एसोसिएशन ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर न्यूनतम वेतन देने की मांग की है।
हाईकोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है। एसोसिएशन ने याचिका में हाईकोर्ट का ध्यान आकर्षित किया है कि रोडवेज के नियमानुसार कुलियों को बस अड्डों पर रहने को अनिवार्य किया गया है।
कुलियों से पांच सौ रुपये पंजीकरण फीस और 100 रुपये लाइसेंस फीस भी वसूली जाती है, लेकिन एवज में सरकार अपने पास से कुछ नहीं देती। कहा है कि कुली को यदि काम मिल गया तो खाना मिल जाता है, नहीं तो वह भूखे पेट सोने को मजबूर हो जाता है।
याचिका में कहा है कि पहले रोडवेज की ओर से उन्हें वर्दी भी दी जाती थी, लेकिन अब यह वर्दी भी मिलनी बंद कर दी गई है। पंजाब सरकार केवल चौथा दर्जा कर्मचारियों को ही वर्दी देती है।
हाईकोर्ट से मांग की गई है कि कुलियों को चौथा दर्जा कर्मचारी के दायरे में लाया जाए, ताकि वह न्यूनतम वेतनमान के साथ अपना गुजर बसर कर सकें। हाईकोर्ट ने सरकार पर तल्ख टिप्पणी करते हुए नोटिस जारी कर जवाब तलब कर लिया है।