चंडीगढ़। पंजाब राजभवन में हर साल गणतंत्र दिवस की शाम आयोजित होने वाले एट होम कार्यक्रम को लेकर इस बार विवाद खड़ा हो गया है। शहर के स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारिक सदस्य और चुने हुए पार्षदों को निमंत्रण न मिलने पर नाराजगी जाहिर की जा रही है, जबकि भाजपा से जुड़े संगठनों के प्रतिनिधियों को बुलाए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी एसोसिएशन ने नाराजगी जाहिर करते एलान किया कि वे अब किसी भी सरकारी कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लेंगे।
स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी एसोसिएशन के केके शारदा ने बताया कि देश को आजाद करने में लाखों लोगों ने अपना सब कुछ लगा दिया। अपनों को खोने का दर्द आज भी उनके परिजन झेल रहे हैं। हर साल 15 अगस्त और 26 जनवरी को सुबह उन्हें परेड ग्राउंड में सम्मानित किया जाता है और शाम को राजभवन में बुलाया जाता था। ऐसी व्यवस्था पिछले 50 वर्षों से चली आ रही थी लेकिन इस बार परेड ग्राउंड में तो बुलाया गया लेकिन शाम के राजभवन के कार्यक्रम के लिए आमंत्रित नहीं किया गया। शारदा ने कहा कि यह स्वतंत्रता सेनानियों का बहुत बड़ा अपमान है। इस मुद्दे पर स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी एसोसिएशन की आपात बैठक बुलाई गई। एसोसिएशन के अध्यक्ष केके शारदा की अध्यक्षता में हुई बैठक में फैसला लिया गया कि स्वतंत्रता सेनानी परिवार भविष्य में होने वाले गणतंत्रता व स्वतंत्रता दिवस के किसी भी कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लेंगे और इनका बहिष्कार करेंगे। अपने इस अपमान के लिए भारत के प्रधानमंत्री व गृहमंत्री को भी ज्ञापन देंगे। इस अवसर पर उपाध्यक्ष मुक्तेश्वर जोशी, महासचिव आनंद सिंह, कोषाध्यक्ष सत्यवान, संगठन सचिव तेजिंदर सिंह, सुखचैन सिंह व दर्शन सिंह मौजूद थे।
सांसद व पंजाब-हरियाणा-चंडीगढ़ के अधिकारी पहुंचे
एट होम कार्यक्रम के लिए पंजाब राजभवन को तिरंगे थीम वाली लाइटिंग और फूलों की सजावट से शानदार ढंग से सजाया गया था, जिससे देशभक्ति का माहौल बना हुआ था। उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र द्वारा प्रस्तुत एक सांस्कृतिक कार्यक्रम ने दर्शकों का मन मोहा। इस कार्यक्रम में पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश शील नागू, भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्य पाल जैन, पंजाब के कैबिनेट मंत्री मोहिंदर भगत, सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी, सांसद मनीष तिवारी, सांसद सतनाम सिंह संधू, मेयर कुलदीप कुमार, चंडीगढ़ के मुख्य सचिव राजीव वर्मा व अन्य पहुंचे। बता दें कि इस बार किसी पार्षद को भी राजभवन से निमंत्रण नहीं पहुंचा। सिर्फ मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर को ही बुलाया गया। इससे भी पार्षद काफी खफा हैं।