पीजीआई वार्ड दो में सोमवार रात को हुई जच्चा-बच्चा की मौत के मामले में डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होते ही मामला गरम हो गया। शुक्रवार शाम को पीजीआई डॉक्टर जहां हड़ताल पर चले गए वहीं, पीजीआई के कार्यवाहक निदेशक ने इस्तीफा सौंप दिया है।
शाम को हड़ताल शुरू होते ही पीजीआई इमरजेंसी और वार्ड में मरीजों के लिए जान का संकट पैदा हो गया। मरीज डॉक्टरों की तलाश में इधर-उधर भटकने लगे लेकिन किसी डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ ने उनकी नहीं सुनी।
यहां शाम के बाद इमरजेंसी में आने वाले करीब एक हजार मरीजों और वार्डों भर्ती दो हजार मरीजों को समस्या खड़ी हो गई। उधर, कार्यवाहक वीसी डॉ. वी. के. जैन को इस्तीफा सौंपने वाले कार्यवाहक निदेशक डॉ. के. बी. गुप्ता ने इस्तीफे के पीछे निजी कारण बताए हैं।
मौत का मामला सरकारी जांच में उलझा
रोहतक पीजीआई में जच्चा-बच्चा की मौत का मामला सरकारी जांच में उलझ गया है। मृतका नीलम और उसके मृत नवजात का पोस्टमार्टम न होना जांच में उलझाव का बड़ा कारण माना जा रहा है।
तीन दिन चली जांच के बाद पीजीआई रोहतक की जांच कमेटी ने जो रिपोर्ट स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को भेजी है, उसमें कहा गया है कि जच्चा-बच्चा की मौत की वजह पर टिप्पणी करना संभव नहीं है।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इसके पीछे कारण यह है कि जच्चा-बच्चा के शव का पोस्टमार्टम नहीं हुआ है। डॉ. प्रवीण मल्होत्रा, डॉ. सविता सिंघल और डॉ. विजय पाल खनगवाल की तीन सदस्यीय कमेटी ने जांच रिपोर्ट विज को सौंपी है।
रिपोर्ट मिलने के बाद विज शनिवार को जींद जाने की तैयारी में हैं। रिपोर्ट की एक कॉपी डीजीपी के पास भेज दी गई है।