पंजाब पुलिस ने पिछले साल हजारों करोड़ के ड्रग रैकेट का पर्दाफाश किया था। उसी मामले ने इस साल पंजाब की सियासत को हिलाकर रख दिया। सड़कों से लेकर सत्ता के गलियारों तक आरोप-प्रत्यारोप गूंजते रहे। आरोपों की आंच से सत्ताधारियों के साथ-साथ विपक्षी भी झुलसे।
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छह मार्च-13 को फतेहगढ़ साहिब पुलिस ने नाके के दौरान एनआरआई अनूप सिंह काहलों की कार से 540 ग्राम हेरोइन बरामद की थी। तब पुलिस को अंदाजा भी नहीं था कि यह गिरफ्तारी उसे 6000 करोड़ रुपये के ड्रग रैकेट तक पहुंचाएगी। काहलों के जीरकपुर फ्लैट की फाल्स सीलिंग से जब हेरोइन के पैकेट गिरे तो पुलिस के होश उड़ गए।
वहां से 1.30 बिलियन रुपये की 26 किलो हेरोइन बरामद हुई। तफ्तीश में सामने आया कि यह अरबों का अंतरराष्ट्रीय सिंथेटिक ड्रग्स रैकेट है, जिसमें स्यूडोफेड्रीन और एम्फेटामाइन जैसे केमिकल से पार्टी ड्रग आइस तैयार कर देश-विदेश में सप्लाई की जाती है। काहलों से पूछताछ में सामने आया कि इसका मास्टरमाइंड पूर्व डीएसपी जगदीश भोला है।
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तफ्तीश के दौरान गिरफ्तारियां और बरामदगी होती रहीं, पर भोला पुलिस के हाथ नहीं आया। आखिर नवंबर, 2013 की शुरुआत में पुलिस ने भोला को दिल्ली के पास गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में पता चला कि भोला का नशा कारोबार कनाडा, नॉर्थ अमेरिका और यूरोप तक फैला हुआ है।
भोला ने लिया मजीठिया का नाम, आया भूचाल
जगदीश भोला से पूछताछ के दौरान पुलिस ने 9 जनवरी, 2014 को मनिंदरजीत सिंह औलख उर्फ बिट्टू और जगजीत चाहल को गिरफ्तार किया। बिट्टू औलख उस समय यूथ अकाली दल अमृतसर देहाती का खजांची था।
औलख से पूछताछ में सामने आया कि उसने ड्रग तस्करी के लिए उन सरकारी एस्कॉर्ट वाहनों का इस्तेमाल किया जो पूर्व सांसद रतन सिंह अजनाला और उनके बेटे मुख्य संसदीय सचिव अमरपाल सिंह बोनी अजनाला को मिले थे।
इस खुलासे से सियासत गर्माई। अजनाला ने सफाई दी कि 2004 के चुनाव में वीर सिंह लोपोके के कहने पर उन्होंने औलख को इलेक्शन एजेंट बनाया था। पार्टी ने अजनाला का बचाव किया, लेकिन लोकसभा चुनाव में उन्हें टिकट से हाथ धोना पड़ा।
6 जनवरी, 2014 को मोहाली अदालत में पेशी के लिए आए जगदीश भोला ने मीडिया को एक बयान देकर सनसनी फैला दी। भोला ने आरोप लगाया कि नशे के इस कारोबार के पीछे कैबिनेट मंत्री बिक्रम मजीठिया हैं।
इससे पंजाब की सियासत में भूचाल आ गया। विपक्ष के हमलों पर सीएम, डिप्टी सीएम और डीजीपी सुमेध सैनी मजीठिया की ढाल बनकर खड़े हो गए। पुलिस ने सफाई दी कि इस बयान में कोई सच्चाई नहीं है।
बेटे का आया नाम, फिल्लौर ने दिया इस्तीफा
पंजाब पुलिस की तफ्तीश के दौरान ही एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट ने भोला से पूछताछ की। भोला ने खुलासा किया कि जेलमंत्री सरवन सिंह फिल्लौर के बेटे दमनवीर सिंह ने दिल्ली के ड्रग तस्कर वरिंदर राजा को गोरायां के कोल्ड स्टोर मालिक चुन्नी लाल गाबा से मिलवाया। गाबा की बद्दी में ड्रग फैक्ट्री भी थी।
इस बीच आयकर विभाग ने 18 फरवरी को गाबा के कोल्ड स्टोर पर छापा मारकर एक डायरी बरामद की, जिसमें कई सियासतदानों और पुलिस अधिकारियों को दी रकम का ब्यौरा था। बाद में ईडी ने वह डायरी कब्जे में ले ली। 28 फरवरी को ईडी ने दमनवीर को सम्मन जारी किए। लोकसभा चुनाव नजदीक थे, मामला गर्मा रहा था। इसे देखते हुए जेलमंत्री सरवन सिंह फिल्लौर ने इस्तीफा दे दिया।
गाबा की डायरी से फंसे कई दिग्गज एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट की तफ्तीश के दौरान चुन्नीलाल गाबा की डायरी से हुए खुलासों में कई दिग्गज फंसे। दमनवीर के बाद सरवन सिंह फिल्लौर का नाम आया। उसके बाद मुख्य संसदीय सचिव अविनाश चंद्र पर आरोप लगे। बाद में कांग्रेस केसांसद चौधरी संतोख तक आंच पहुंची।
आखिर ईडी ने 13 अक्तूबर को चौधरी संतोख से पूछताछ की। अविनाश और सरवन सिंह फिल्लौर को 17 अक्तूबर को तलब किया। बढ़ते-बढ़ते तफ्तीश आखिर दिग्गज मंत्री बिक्रम मजीठिया तक पहुंची। ईडी ने मजीठिया को समन किया और 26 दिसंबर को मजीठिया से पूछताछ की गई।
सदन में छाया रहा नशे का मुद्दा
इस साल हुए पंजाब विधानसभा के सभी सत्रों में नशों का मुद्दा छाया रहा। मार्च में कांग्रेस ने राज्यपाल के भाषण का बायकॉट कर वाकआउट किया। जुलाई में सत्र के दौरान विपक्ष ने बिक्रम सिंह मजीठिया पर हमला बोला।
इसी बीच मानसा पुलिस द्वारा गिरफ्तार तस्कर गुरलाल सिंह ने आरोप लगाया कि उसने गिदड़बाहा के कांग्रेस विधायक अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को 2012 के चुनाव में फंडिंग की है। इससे कांग्रेस बैकफुट पर आई और मजीठिया हावी हो गए। वड़िंग ने इसे गलत बताते हुए सीबीआई जांच की मांग की। हाल ही में हुए सत्र से पहले मजीठिया को ईडी का नोटिस जारी हो चुका था। कांग्रेस इस मुद्दे पर सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाई, जो गिर गया।
हाईकोर्ट पहुंचा मामला ड्रग रैकेट का मामला हाईकोर्ट भी पहुंचा। कांग्रेसियों समेत कई लोगों ने याचिका दायर कीं। अदालत ने सीबीआई व नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो केपक्ष सुने। फिर फैसला दिया कि जांच पंजाब पुलिस ही करेगी। हाईकोर्ट ने साफ कहा कि इस मामले को सियासी रंग न दिया जाए।
चुनावी मुद्दार बना लोकसभा चुनाव के दौरान भी नशों का मुद्दा हावी रहा। आप कन्वीनर अरविंद केजरीवाल ने सरकार पर हमला बोला। कांग्रेस भी सरकार पर धावा बोलती रही। अमृतसर से भाजपा उम्मीदवार अरुण जेटली को भी मानना पड़ा कि नशों का मुद्दा अहम है।
ड्रग रैकेट को लेकर विपक्ष सरकार पर हमले बोलता रहा, पर भाजपा चुप रही। लोक सभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नशों पर चिंता जताई। बाद में मन की बात के दौरान भी मोदी ने पंजाब में नशों पर चिंता जाहिर की। इसकेबाद भाजपा भी सरकार के खिलाफ मुखर हुई। प्रदेश प्रधान कमल शर्मा ने कहा कि मजीठिया को इस्तीफा देना चाहिए।
कांग्रेस उलझी रही कांग्रेस नशों के मुद्दे पर लगातार हमले बोलती रही। पर ड्रग रैकेट की सीबीआई जांच को लेकर पार्टी बंटी रही। प्रदेश प्रधान प्रताप बाजवा ने जांच सीबीआई से कराने की मांग को लेकर आंदोलन छेड़ा। पर कैप्टन अमरिदंर सिंह आखिर तक यही कहते रहे कि पंजाब पुलिस को ही जांच करनी चाहिए। इसमें कोई गड़बड़ी की आशंका नहीं है, क्योंकि चार केंद्रीय एजेंसियां भी जांच में शामिल हैं।