चंडीगढ़। सेक्टर-9 में कोठी नंबर-341 को लेकर एस्टेट ऑफिस की कार्रवाई अब विवादों में घिर गई है। पंजाब के एक राइस मिलर की चार कनाल की कोठी को सोमवार को एस्टेट ऑफिस ने खाली कराकर नए खरीदार को कब्जा दिलाया लेकिन अब शेयर-वाइज ट्रांसफर पर सवाल खड़े हो गए हैं।
बैंक की नीलामी में कोठी को प्रवीण कुमार गर्ग ने खरीदा था। बॉम्बे हाईकोर्ट में केस हारने के बाद भी पंजाब के राइस मिलर व पूर्व मालिक जनक राज सिंह कोठी खाली नहीं कर रहे थे। अदालत के आदेश के बाद एस्टेट ऑफिस ने हस्तक्षेप करते हुए कब्जा प्रवीण कुमार गर्ग को दिलाया। मामले ने तूल तब पकड़ा जब सामने आया कि कोठी का 79.08 प्रतिशत हिस्सा प्रवीण कुमार गर्ग और 20.92 प्रतिशत हिस्सा प्रभा गौतम के नाम ट्रांसफर किया गया है। चंडीगढ़ प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शेयर-वाइज रजिस्ट्री पर रोक लगी हुई थी, इसके बावजूद एस्टेट ऑफिस ने अपनी ही एसओपी की अनदेखी की।
एसोसिएशन के अध्यक्ष विक्रम चोपड़ा ने कहा कि 26 फरवरी को 79.08 प्रतिशत हिस्से का ट्रांसफर किया गया, जो दोहरी नीति को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यदि बिना ब्लड रिलेशन क्लॉज के शेयर ट्रांसफर संभव है, तो अन्य मामलों में इसे क्यों रोका जा रहा है। एसोसिएशन ने दावा किया कि शेयर-वाइज रजिस्ट्री दोबारा शुरू होने से प्रशासन को करीब 600 करोड़ रुपये का राजस्व मिल सकता है। उन्होंने सभी लंबित मामलों में समान नीति लागू करने की मांग की है।