किडनी बचानी है तो डायबिटीज और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करना होगा। किडनी फेल होने वालों में डायबिटिक पेशेंट की संख्या सबसे ज्यादा है। यह कहना है मैक्स हास्पिटल के डाक्टरों का।
एक साल में 100 सक्सेस किडनी ट्रांसप्लांट होने के अवसर पर आयोजित प्रेस वार्ता में डाक्टरों ने बताया कि पूरे भारत में एक साल में एक लाख लोगों को किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है। यह आंकड़ा बहुत ज्यादा है, इनमें से कुछ ही लोगों को किडनी मिल पाती है। बाकी को डायलिसिस पर जीना पड़ता है।
डायलिसिस हर किसी के बस की बात नहीं होती। इसलिए लोगों को किडनी बचाने के लिए अपना लाइफ स्टाइल बदलना होगा। हास्पिटल के नेफ्रोलॉजी एंड ट्रांसप्लांट मेडिसिन के डायरेक्टर डॉ. विनय सखूजा, डॉ. मुनीष चौहान, डॉ. सानंदा बाग, डॉ. जगदीश सेठी ने बताया कि हर माह निजी सेंटर्स में 30-35 ट्रांसप्लांट्स किए जा रहे हैं, जबकि सरकारी संस्थानों में 15-20 सर्जरी।
मैक्स हॉस्पिटल में एबीओ इनकंपेटेबल किडनी ट्रांसप्लांट्स, एचआईवी पाजिटिव ट्रांसप्लांट्स को सफलतापूर्वक अंजाम दिया जा रहा है। डॉ. जगदीश सेठ ने बताया कि ट्राइसिटी आने वाले सालों में अंग प्रत्यारोपण का सर्वाधिक पसंदीदा स्थल होगा, क्योंकि शहर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट की शुरुआत होने से शहर से विदेशों में भी कनेक्टिविटी भी बढ़ेगी। इससे सार्क देशों, मध्य पूर्व और अफगानिस्तान से भी आने वाले मरीजों की संख्या बढ़ेगी।