पंजाब में लोकसभा चुनावों को लेकर पार्टियों की ओर से उम्मीदवारों की घोषणा से स्थिति साफ होने लगी है। अभी तक की तस्वीर में पंजाब में बड़ा उलटफेर भाजपा ने किया है, जहां सिख चेहरों को ज्यादा तवज्जो दी है। उधर, पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री विजय सांपला पंजाब व भाजपा की राष्ट्रीय सियासत से आउट हो गए हैं। इस बार फिर से उनको टिकट नहीं दिया गया। भाजपा ने होशियारपुर से मौजूदा केंद्रीय राज्यमंत्री सोमप्रकाश की पत्नी अनीता सोमप्रकाश को टिकट दिया है।
आम आदमी पार्टी
आप की तरफ से पांच मंत्रियों को लोकसभा उम्मीदवार बनाया गया है। इनमें अमृतसर से मंत्री कुलदीप धालीवाल, खडूर साहिब से मंत्री लालजीत भुल्लर, बठिंडा से मंत्री गुरमीत सिंह खुडि्डयां, संगरूर से मंत्री गुरमीत सिंह मीत हेयर और पटियाला से मंत्री डॉ. बलबीर सिंह शामिल हैं। वहीं, कांग्रेस से आए विधायक राजकुमार चब्बेवाल को भी होशियारपुर से उतारा गया है।
इसके अलावा लुधियाना से विधायक अशोक पप्पी पराशर, फिरोजपुर से विधायक जगदीप सिंह काका बराड़, गुरदासपुर से विधायक अमनशेर सिंह शैरी कलसी को टिकट दिया गया है। यानी आप के 9 उम्मीदवारों में से अगर कोई जीत जाता है तो पंजाब में उस सीट पर उपचुनाव होने तय हैं। आप के विधायक शीतल अंगुराल पार्टी व विधायक के पद से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो चुके हैं। आप की तरफ से मंत्रियों व विधायकों को टिकट देकर इरादे साफ कर दिए हैं कि पंजाब के लोकसभा चुनावों में पार्टी पूरी ताकत झोंकने जा रही है।
भाजपा
शिरोमणि अकाली दल की कमी को पूरा करने के लिए भाजपा जाट सिखों पर फोकस कर रही है। पंजाब में भाजपा 28 साल बाद बिना गठबंधन के चुनाव लड़ने जा रही है। भाजपा दूसरे दलों के प्रमुख सिख नेताओं और गैर-राजनीतिक लेकिन प्रभावशाली सिख चेहरों, विशेषकर जाट सिख को जोड़कर इन चुनावों में अकाली दल की कमी को पूरा करने की तैयारी में है। यही वजह है कि भाजपा ने इस बार महिलाओं और जाट सिखों को खासा प्रतिनिधित्व दिया है।
पंजाब में लोकसभा की 13 सीटें हैं। पिछले तीन दशकों से भाजपा ने राज्य में अधिकतर तीन लोकसभा सीटों पर ही चुनाव लड़ा है। इस बार भाजपा को 13 सीटों पर उम्मीदवार उतारना है। उसने अपनी रणनीति के तहत विभिन्न पार्टियों के कई सिख नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल करवाया है। पूर्व राजनयिक तरणजीत सिंह संधू को भी भाजपा ने टिकट दी है जो जट सिख हैं। परनीत कौर व रवनीत बिट्टू भी जट सिख हैं। दोनों को कांग्रेस से लाकर भाजपा ने टिकट दी है। पंजाब में भाजपा बड़े पैमाने पर राज्य के शहरी कस्बों में हिंदू मतदाताओं तक ही सीमित रही है। बठिंडा से परमपाल कौर को टिकट दिया गया है, जो सशक्त महिला हैं और जाट सिख समुदाय से हैं। वहीं खडूर साहब से मंजीत मन्ना सिख चेहरे को मैदान में उतारा गया है। भाजपा की तरफ से तीन महिलाओं को टिकट दिया गया है।
तरणजीत सिंह संधू पंथक (सिख धर्म के प्रति समर्पित) जाट सिख हैं, शिक्षित हैं और एक विश्वसनीय चेहरा हैं। अमेरिका में भारत के पूर्व राजदूत, संधू के दादा सरदार तेजा सिंह समुंद्री, एसजीपीसी के संस्थापकों में से एक थे। पंजाब में अकाली राजनीति मुख्य रूप से एसजीपीसी पर आधारित है। भाजपा ने संधू को उतारकर अमृतसर में दिलचस्प टक्कर बना दी है। कांग्रेस की तरफ से पुराने सांसद गुरजीत औजला मैदान में हैं। आप के मंत्री कुलदीप धालीवाल के अलावा अकाली दल ने हिंदू चेहरे अनिल जोशी को मैदान में उतारा है। 2022 के विधानसभा चुनावों को छोड़कर बीते तीन दशकों में भाजपा और शिअद ने एक साथ चुनाव लड़ा है। दोनों एक दूसरे को शहरी हिंदू वोट और पंथिक सिख वोट ट्रांसफर करते रहे हैं। इस तरह दोनों पार्टियां एक दूसरे को फायदा पहुंचा चुकी हैं, लेकिन इस लोकसभा चुनाव में भाजपा और शिअद के बीच गठबंधन नहीं है।
जालंधर में सुशील रिंकू व चन्नी को घेरने की तैयारी, टक्कर कांटे की
अकाली दल के दो बार विधायक रह चुके पवन टीनू इस बार आप से चुनाव लड़ने जा रहे हैं। उनके नाम की घोषणा हो गई है। हालांकि अकाली दल ने अभी घोषणा नहीं की है, लेकिन जालंधर सीट पर चार प्रमुख पार्टियों ने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। इसमें आप की तरफ से पवन टीनू, कांग्रेस की तरफ से पूर्व सीएम चरणजीत चन्नी, भाजपा ने सुशील रिंकू व बसपा ने फायर ब्रांड नेता बलविंदर कुमार को मैदान में उतारा है। बलविंदर कुमार ने पिछले चुनावों में बसपा की टिकट पर दो लाख से अधिक वोट लेकर तमाम पार्टियों को हिलाकर रख दिया था। जालंधर रविदासिया समाज का गढ़ है और उनका वोट बहुसंख्यक हैं। चारों नेता रविदासिया समाज से हैं।
खडूर साहब सीट पर पहली बार मैदान में भाजपा
खडूर साहब सीट पर भाजपा पहली बार मैदान में है। यह सीट पंथक है और इस पर पंथक वोट अधिक होने के कारण भाजपा ने मंजीत सिंह मन्ना को मैदान में उतारा है। आप की तरफ से मंत्री लालजीत भुल्लर मैदान में हैं। अकाली दल ने घोषणा नहीं की है, यहां से हरसिमरत कौर को उतारने की तैयारी की जा रही है। पंजाब की खडूर साहिब लोकसभा सीट पर इस बार मुकाबला दिलचस्प हो सकता है। यहां से पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल के चुनाव लड़ने की चर्चा चल रही है। वहीं, कांग्रेस ने अंदरूनी फूट के डर से अभी तक प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है। संसदीय क्षेत्र खडूर साहिब से शिअद ने पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया को हलका इंचार्ज बनाया था, परंतु बाद में मजीठिया ने लोकसभा चुनाव लड़ने से हाथ खींच लिए थे। अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने कई नेताओं के नाम पर चर्चा की लेकिन कोई दिग्गज नेता सामने नहीं आया।
कांग्रेस से मौजूदा सांसद जसबीर सिंह डिंपा दोबारा टिकट की जुगत में हैं। वे दिन-रात एक कर रहे हैं। वहीं, पूर्व मंत्री राणा गुरजीत सिंह अपने बेटे राणा इंद्र प्रताप सिंह को यहां से चुनाव लड़वाना चाहते हैं। उन्होंने दिल्ली में डेरा डाल रखा है। कांग्रेस हाईकमान की नजर शिअद पर टिकी है। कांग्रेस चाहती है कि शिअद पहले प्रत्याशी की घोषणा करे। इसके बाद फैसला लिया जाएगा कि यहां से मौजूदा सांसद जसबीर सिंह डिंपा चुनाव लड़ेंगे या फिर कोई और। अगर हरसिमरत कौर बादल को शिअद ने चुनाव मैदान में उतारा तो कांग्रेस पूर्व मंत्री राणा गुरजीत सिंह को खुद चुनाव मैदान में उतार सकती है। निश्चित तौर पर इस सीट पर पंजाब में सबसे अधिक दिलचस्प मुकाबला होना तय है।