बच्चे को जन्म देने के बाद किसी कारणवश महिला की मौत हो गई। महिला का प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत बीमा हुआ था। मृत्यु के कुछ महीने बाद महिला के पति ने क्लेम के लिए आवेदन किया लेकिन पंजाब नेशनल बैंक ने यह कहते हुए क्लेम देने से मना कर दिया कि यह कोई एक्सीडेंट नहीं था। इसके बाद उपभोक्ता फोरम ने पीएनबी पर जुर्माना लगाया है। साथ ही कहा है कि महिला के परिवार में किसी ने नहीं सोचा था कि डिलीवरी के समय मृत्यु हो जाएगी, यह भी एक एक्सिडेंट ही होता है।
धनास की कच्ची कालोनी में रहने वाले संजय सुरिन ने उपभोक्ता फोरम में धनास स्थित पंजाब नेशनल बैंक के खिलाफ शिकायत दी। शिकायत में बताया कि उन्होंने अपनी पत्नी का प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई) और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई) के तहत मई 2016 में पीएनबी से बीमा कराया था, जिसके लिए उनके अकाउंट से पेमेंट भी कटती रही। दिसंबर 2016 में डिलीवरी के दौरान खून ज्यादा बहने से पत्नी की मृत्यु हो गई।
नॉमिनी होने के चलते उन्होंने मार्च 2017 में बीमा का क्लेम लेने के लिए बैंक में अप्लाई किया और सभी डाक्युमेंट्स भी बैंक को सौंप दिए। बैंक ने प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत तो क्लेम की राशि दे दी लेकिन प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना का क्लेम देने से मना कर दिया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने फोरम का रुख किया। फोरम ने पीएनबी को नोटिस भेजा। बैंक ने कहा कि उन्होंने सेवा में कोई कोताही नहीं बरती है।
एक्सिडेंट में नहीं हुई मौत, इसलिए क्लेम नहीं: बैंक
बैंक ने अपने जवाब में कहा कि प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के लिए सिर्फ वही पात्र होते हैं, जिनकी मृत्यु एक्सिडेंट में हुई हो। इसलिए शिकायतकर्ता इस क्लेम के लिए हकदार नही है। हालांकि, फोरम में बैंक की इस दलील को पूरी तरह से खारिज कर दिया।
फोरम ने अपने आदेश में कहा कि महिला (मां) द्वारा बच्चे की डिलीवरी एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो सामान्य प्रसव या सिजेरियन डिलीवरी से होती है। उचित दवा और पर्याप्त आराम के बाद महिला अपने बच्चे और परिवार की उचित देखभाल करने के लिए फिट हो जाती है। फोरम ने कहा कि डिलीवरी के दौरान मृत्यु हो जाना भी एक एक्सिडेंट ही है। इसकी शिकायतकर्ता के परिवार में किसी ने कल्पना नहीं की थी।
फोरम ने सुनाया यह फैसला
फोरम ने पंजाब नेशनल बैंक को सेवा में कोताही का दोषी करार दिया है। उपभोक्ता फोरम ने शिकायतकर्ता को प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत मिलने वाले क्लेम की पूरी राशि जारी करने के आदेश दिए हैं। साथ ही मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न के लिए 20 हजार रुपये मुआवजा और 10 हजार रुपये मुकदमा खर्च भी देने के निर्देश दिए हैं।
आदेश की प्रति मिलने पर 30 दिनों के अंदर इन आदेशों की पालना करनी होगी, नहीं तो क्लेम और मुआवजे राशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज भी देना होगा।