नगर निगम ने शहर में लोगों की सुविधाओं के लिए खर्च हो रही बिजली का खर्च कम करने का फैसला किया है। इसके लिए निगम ने कंसलटेंसी कंपनी नियुक्त करने का निर्णय लिया है।
यह कंसलटेंसी कंपनी निगम को बताएगी कि किस तरह व्यवस्था में सुधार करके बिजली खर्च में कटौती की जा सकती है।
निगम ने शनिवार को कंसलटेंसी कंपनी नियुक्त करने के लिए टेंडर निकाला है। निगम के अनुसार स्मार्ट सिटी के तहत एनर्जी का आडिट होना चाहिए। इसके लिए कंसलटेंसी कंपनी नियुक्त की जाएगी। निगम ने बिजली का खाका तय करने के लिए यह टेंडर जारी किया है।
टेंडर में यह भी कहा गया है कि बिजली खर्च में कटौती करने के लिए निगम की ओर से पूरे शहर में एलईडी लाइट्स लगाई जाएंगी। इसके लगाने पर खर्चा कैसे कम किया जा सकता है, इसके लिए कंसलटेंसी कंपनी सुझाव देगी। नगर निगम के अनुसार एलईडी लाइट्स लगने से बिजली खर्च सात गुना कम होने की उम्मीद है। नगर निगम ने 16 जून तक प्रपोजल भेजने को कहा है। वहीं, दूसरी ओर पब्लिक हेल्थ विभाग इस समय भाखड़ा से लोगों तक पानी पहुंचाने के लिए बिजली पर साढ़े चार करोड़ रुपये खर्च कर रहा है।
जनस्वास्थ्य विभाग करोड़ों रुपये दे रहा बिजली बिल
कजौली से सेक्टर-39 के प्रमुख वाटर वर्क्स तक पानी पहुंचाने के लिए निगम को हर माह ढाई करोड़ रुपये बिजली बिल का भुगतान करना पड़ता है, जबकि एक करोड़ रुपये का बिजली बिल वाटर वर्क्स से लोगों के घरों तक पानी पहुंचाने पर आता है। इसके अलावा शहर में चल रहे 220 ट्यूबवेलों का बिजली खर्च हर माह एक करोड़ रुपये अलग से भुगतान करना पड़ता है। निगम के अनुसार कंसलटेंसी कंपनी यह बताएगी कि किस तरह मोटर और पंपिंग स्टेशन चलाया जाए, जिससे खर्चा कम हो सके।