पंजाब में चार महत्वपूर्ण हाईवे के निर्माण के रुके हुए काम का रास्ता खुल गया है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने शुक्रवार को नेशनल हाईवे अथारिटी आफ इंडिया (एनएचएआई) की याचिका पर सुनवाई करते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के 19 मई को जारी उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें पूर्व अनुमति पंजाब में एक भी पेड़ काटने पर रोक लगाई गई थी। इसके साथ ही हाईकोर्ट के जस्टिस एजी मसीह और जस्टिस हरि पाल वर्मा की वेकेशन बेंच ने केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, पंजाब के मुख्य वन संरक्षक और एनजीटी को 19 जुलाई के लिए नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
हाईकोर्ट के इस आदेश के साथ ही पंजाब में चंडीगढ़-अंबाला नेशनल हाईवे-22 की सर्विस रोड, खरड़-कुराली सेक्शन की फोरलेनिंग व बाईपास, चंडीगढ़-खरड़ सेक्शन की फोर लेनिंग, जालंधर-अमृतसर हाईवे की सिक्स लेनिंग और अमृतसर बाईपास व सर्विस रोड के निर्माण का काम शुरू करने में रास्ता खुल गया है।
याचिकाकर्ता एनएचएआई ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट से कहा कि एनजीटी ने पंजाब में केवल एक प्रोजेक्ट के मामले में सुनवाई करते हुए पूरे पंजाब में ही एनजीटी की आज्ञा के बिना पेड़ काटने पर पाबंदी लगा दी है। एनजीटी के इस आदेश के कारण राज्य में कई जनहित के प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य रुक गए हैं। एनएचएआई ने आगे कहा कि एनजीटी के आदेश के कारण ऐसे प्रोजैक्टों के निर्माण पर भी रोक लग गई है, जिनके लिए पहले से मंजूरी ली जा चुकी है।
याचिका में यह भी कहा गया कि ऐसे प्रोजेक्टों के रुकने से आम जनता को नुकसान उठाना पड़ेगा। यह सभी प्रोजेक्ट तय समय सीमा में पूरे किए जाने हैं, इसलिए एनजीटी के आदेश पर रोक लगाई जाए। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने एनजीटी के आदेश पर रोक लगा दी।
इन प्रोजेक्टों का रास्ता हुआ साफ
- चंडीगड़-अंबाला एनएच-22 की सर्विस लेन व ड्रेन
- चंडीगड़-खरड़ मार्ग की फोर लेनिंग
- खरड़-कुराली मार्ग की फोर लेनिंग
- जालंधर-अमृतसर हाईवे की सिक्स लेनिंग