रिश्वत मामले में फरार चल रहे चंडीगढ़ पुलिस के कांस्टेबल पवन कुमार को फिलहाल सीबीआई गिरफ्तार नहीं करेगी। सीबीआई ने सोमवार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से अपील की है कि याची को जांच में शामिल होने का आदेश दिया जाए। यदि उसे गिरफ्तार करना होगा तो सीबीआई इससे पहले उसे पांच दिन का नोटिस देगी। हाईकोर्ट ने याची को एक सप्ताह में जांच में शामिल होने का आदेश देते हुए याचिका का निपटारा कर दिया। सीबीआई ने शिकायत के आधार पर ट्रैप लगाया था लेकिन याचिकाकर्ता को गिरफ्तार नहीं कर सकी थी।
पवन कुमार ने इससे पहले सीबीआई की विशेष अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। याचिका के साथ पवन ने शिकायतकर्ता दीपक उर्फ दीपा का एक वीडियो भी सौंपा था जिसमें वह हाथ में अवैध हथियार लेकर घूमता दिख रहा था। अग्रिम जमानत याचिका में पवन ने इसी वीडियो को आधार बनाते हुए कहा था कि दीपक के पास अवैध हथियार थे और गैंगस्टर से उसके संबंध हैं। उसे सरेंडर करने के लिए कहा गया तो उसने सात लाख रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप लगाते हुए सीबीआई को शिकायत दे दी थी।
पवन ने कहा कि उसने कहीं भी रिश्वत नहीं मांगी, यहां तक ट्रांसक्रिप्ट में भी रिश्वत स्वीकार नहीं की गई। याचिकाकर्ता जांच में सहयोग के लिए पूरी तरह से तैयार है लेकिन उसे अग्रिम जमानत दी जानी चाहिए। सीबीआई अदालत ने उसकी जमानत याचिका को सभी पक्षों को सुनने के बाद खारिज कर दिया था। इसके बाद अग्रिम जमानत के लिए याची ने हाईकोर्ट की शरण ली थी।
रामदरबार निवासी दीपक उर्फ दीपा ने सीबीआई को मामले की शिकायत देकर आरोप लगाया था कि कांस्टेबल पवन उसे एक केस में फंसाने की धमकी देकर सात लाख की रिश्वत मांग रहा है। शिकायतकर्ता ने तत्कालीन ऑपरेशन सेल इंचार्ज इंस्पेक्टर हरिंदर सेखों पर भी आरोप लगाए थे लेकिन इंस्पेक्टर सेखों के खिलाफ सीबीआई को कोई भी सबूत नहीं मिला, जिसके चलते उन्हें आरोपी नहीं बनाया गया। सीबीआई ने दीपक की शिकायत पर पवन के अलावा मनीष दुबे और अनिल गोयल उर्फ कोकी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। मनीष और कोकी को सीबीआई ने ट्रैप के वक्त गिरफ्तार कर लिया था जबकि पवन फरार हो गया था।