चंडीगढ़। 16 जनवरी से शुरू होने वाले टीकाकरण अभियान में सबसे पहले हेल्थ केयर वर्कर्स को टीके लगाए जाने हैं। अभियान की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य निदेशक डॉ. अमनदीप कंग ने विभाग में तैनात डॉक्टरों के साथ ही प्रत्येक वर्ग के के कर्मचारियों की सहमति पूछी है। इसमें विभाग के 50 प्रतिशत से ज्यादा लोगों ने टीका लगवाने के लिए हामी भर दी है। इसमें डॉक्टर, नर्सिंग ऑफिसर, फार्मासिस्ट, टेक्निकल स्टाफ के साथ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शामिल हैं।
चिकित्सा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि टीकाकरण के लिए जोर-जबरदस्ती करना ठीक नहीं है। इस अभियान को सफल बनाने के लिए लोगों की स्वेच्छा बहुत जरूरी है। सरकार ने टीकाकरण शुरू करने से पहले चुने गए वैक्सीन का प्रत्येक स्तर पर वैज्ञानिक आकलन किया है। उसके परिणाम से संतुष्ट होने के बाद ही टीकाकरण शुरू करने का निर्णय लिया गया है। इस बात को समझते हुए लोगों को इस अभियान में पूर्ण सहयोग देना चाहिए, क्योंकि अगर सरकारी अभियान में टीकाकरण कराने से चूक गए तो फिर उन्हें इसके लिए मोटी रकम चुकानी पड़ेगी।
हामी भरने वालों में महिलाओं की संख्या ज्यादा
कोरोना वैक्सीन आने के बाद स्वास्थ्य निदेशक ने सभी सरकारी अस्पतालों के सभी विभागों के विभागाध्यक्ष और अन्य कर्मचारियों के प्रभारियों को निर्देशित किया कि वे अपने कर्मचारियों से टीकाकरण कराने के बारे में पूछ लें। उनके निर्देशानुसार सभी ने अपने विभाग के बनाए गए व्हाट्सएप ग्रुप पर मैसेज चलाया तो कुछ ही घंटे बाद लगभग आधे लोगों ने टीकाकरण के लिए हामी भरते हुए अपनी रजामंदी जता दी। हामी भरने वालों में महिलाओं की संख्या ज्यादा है।
सबका एक ही संकल्प.. योद्धा डरते नहीं
सहमति देते समय सभी डॉक्टरों व कर्मचारियों का यही कहना है कि कोरोना महामारी के इस दौर में उन्हें योद्धा कहा गया है और योद्धा कभी डरते नहीं है। जब संक्रमण के दौर में पीछे नहीं हटे तो संक्रमण से बचाव के लिए होने वाले टीकाकरण अभियान में वे पीछे कैसे रह सकते हैं। वे तो चाहते हैं कि जल्द से जल्द उनका टीकाकरण हो जाए ताकि वे निडर होकर अपना फर्ज निभा सकें।
क्या कहते हैं अधिकारी
मुझे यह जानकर बेहद खुशी हुई कि मेरा स्टाफ इस अभियान में मेरे साथ है। उनके उत्साह से एक बात तो तय है कि टीकाकरण अभियान शत प्रतिशत सफल होगा। -डॉ. अमनदीप कंग, स्वास्थ्य निदेशक