कुलदीप वत्स का कहना है कि पंचायती राज कानून 1952 में बना है, जबकि ब्राह्मण, जांगड़ा ब्राह्मण, प्रजापति, लोहार, वाल्मीकि, तेली व अन्य एससी जातियों को धौलीदार मानते हुए जमीनों का आवंटन 1862 से लेकर 1952 तक हुआ है। जब एक्ट ही नहीं बना था तो आवंटित जमीनों को पंचायती राज का कैसे माना जा सकता है। 2011 में पूर्व हुड्डा सरकार ने इन जमीनों का मालिकाना हक धौलीदारों को दे दिया था। जिसे गठबंधन सरकार ने छीन लिया है। वे जनता के बीच जाएंगे और इस मामले को लेकर हाईकोर्ट जाएंगे। चूंकि, धौलीदारों की जमीन के एक मामले में हाईकोर्ट का फैसला आया भी हुआ है।
चुनिंदा लोगों को पहुंचाया लाभ, क्या जांच करा दें: दुष्यंत
डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने सदन में कहा कि 2011 में पूर्व सरकार के मालिकाना हक देने का फायदा चुनिंदा लोगों को हुआ है। पात्र तो इसमें रह ही गए। पंचायत की जमीनें किसी को दान नहीं दी जा सकती। नेता प्रतिपक्ष कहें तो इसकी जांच करा देते हैं। उन्होंने हुड्डा से हामी भराने की कोशिश की, लेकिन नेता प्रतिपक्ष ने कोई जवाब नहीं दिया।