प्रदेश कांग्रेस प्रधान प्रताप सिंह बाजवा ने पीपुल्स पार्टी ऑफ पंजाब के साथ समझौता करके हाईकमान की नजर में अपने नंबर बढ़ा लिए हैं।
हलके के कांग्रेसियों के विरोध पर भी उन्होंने पीपीपी प्रधान मनप्रीत बादल को पतंग चुनाव निशान पर बठिंडा से लड़ाने का ऐलान भी कर दिया है। लेकिन यह यह चुनावी यारी, भारी भी पड़ सकती है।
बठिंडा के कांग्रेस नेता अभी तक 2012 के विधानसभा चुनाव भूले नहीं हैं। उस चुनाव में उनकी जीती हुई बाजी सिर्फ पीपीपी की वजह से अकाली दल केपाले में चली गई थी।
बठिंडा के सभी विधानसभा हलकों में कांग्रेस का पलड़ा भारी था। पीपीपी को कुछ वोट बैंक शिफ्ट होने से कांग्रेस की हार हुई। कांग्रेस इस हलके में सिर्फ तीन सीटें ही जीत पाई थी। जिनमें भुच्चो मंडी से अजायब सिंह भट्टी, तलवंडी साबो से जीत मोहिंदर सिद्धू और सरदूलगढ़ से अजीत इंदर सिंह मोफर शामिल थे। बाकी छह सीटों पर पीपीपी को पड़े वोटों के चलते कांग्रेस हार गई और अकाली दल जीत गया। जीत-हार का अंतर भी बहुत कम था।
ऐलान के साथ ही मनप्रीत ने बठिंडा में सरगर्मी शुरू कर दी है। लेकिन हलके के कांग्रेस दिग्गजों ने अभी तक खुलकर मनप्रीत के साथ चलना शुरू नहीं किया है। बठिंडा शहरी हलके के सुरिंदर सिंगला, हरमिंदर जस्सी जैसे नेता अभी तक सामने नहीं आए हैं। बाकी हलकों में भी कांग्रेस की रफ्तार सुस्त है।
अगर मनप्रीत कांग्रेसियों को मनाने में कामयाब न हुए तो कांग्रेसी अंदरखाते भितरघात कर सकते हैं। हालांकि हाईकमान की सख्ती के कारण खुलकर कोई बगावत नहीं करेगा। कांग्रेसियों में यह भी चर्चा है कि उनका पूरा वोट बैंक पतंग निशान पर शिफ्ट कराना भी मुश्किल होगा। जिसका फायदा अकाली दल को मिलेगा।
छह सीटों पर पीपीपी ने बाजी पलटी
चंडीगढ़। विधानसभा चुनाव में बठिंडा लोकसभा हलके की छह सीटों पर पीपीपी केचलते कांग्रेस हारी। रामपुरा फूल से शिअद के सिकंदर सिंह मलूका को 58143, कांग्रेस केगुरप्रीत कांगड़ को 53005 और पीपीपी के लखवीर सिंह को दस हजार वोट मिले।
बठिंडा शहरी से शिअद से सरूप सिंगला को 62546 कांग्रेस के हरमिंदर जस्सी को 55901 और पीपीपी के सुखदीप भिंडर को 10755 वोट मिले। बठिंडा रूरल में शिअद के दर्शन सिंह कोटफत्ते को 45705, कांग्रेस के मक्खन सिंह को 40397 और सीपीआई के सुरजीत सिंह को 17655 वोट मिले।
मौड़ से शिअद के जनमेजा सिंह सेखों को 45349, कांग्रेस के मंगत राय बांसल को 43962 और पीपीपी के मनप्रीत बादल को 26398 वोट मिले। मानसा में शिअद के प्रेम मित्तल को 55417, कांग्रेस की गुरप्रीत कौर को 54409 और सीपीआई के हरदेव अर्शी को तीस हजार वोट मिले।
वहीं, बुढलाडा में शिअद के चेतन सिंह 51504, कांग्रेस के सतपाल सिंह को 45066 वोट मिले। पीपीपी की रंजीत कौर को 39385 वोट हासिल हुए।
मनप्रीत ने शुरू किया डैमेज कंट्रोल
मनप्रीत बादल को भी कांग्रेसियों के जख्मों का एहसास है। इसलिए उन्होंने चुनाव अभियान की शुरुआत डैमेज कंट्रोल से की है। वह सबसे पहले हलके के प्रमुख कांग्रेसी नेताओं के घर जाकर उन्हें मनाने में लगे हैं। वह अजायब सिंह भट्टी के घर पहुंचे, जहां मक्खन सिंह भी मौजूद थे।
इसके बाद मानसा में शेर सिंह गागोवाल के घर गए, जिनकी बहू मामूली अंतर से हारी थीं। वीरवार को वह गुरप्रीत कांगड़ के घर पहुंचे। मनप्रीत इस हलके में पूरी तरह कांग्रेस पर निर्भर हैं, पीपीपी का कोई बड़ा नेता नहीं है। इसलिए वह कांग्रेसियों को मनाने पर ही फोकस कर रहे हैं।