लोकसभा चुनाव के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह और सिद्धू के बीच छिड़े विवाद के बाद कैप्टन ने उनसे स्थानीय निकाय विभाग छीन कर बिजली विभाग की जिम्मेदारी सौंप दी थी। सिद्धू ने विभाग का चार्ज लेने से इंकार कर कैप्टन मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था।
सिद्धू ने अपना इस्तीफा कैप्टन को न भेज कर तत्कालीन अध्यक्ष राहुल गांधी को भेजा था। जब विवाद बढ़ा तो उन्होंने अपना इस्तीफा कैप्टन को भेजा था। उसके बाद से ही सिद्धू चुप थे। कैप्टन से उनकी नाराजगी इस कदर बढ़ गई कि उन्होंने न तो कैप्टन द्वारा बुलाई गई विधायक दल के बैठक में हिस्सा लिया और न ही वे विधानसभा के वर्तमान बजट सेशन में दिखे।
दिल्ली विधानसभा चुनाव से बना रखी थी दूरी
बता दें कि पिछले कई महीनों से नवजोत सिंह सिद्धू खामोश थे। वहीं आलाकमान से मुलाकात के बाद उनकी सक्रियता पंजाब में बढ़ सकती है। पिछले साल 21 जुलाई को नवजोत सिंह सिद्धू ने आखिरी ट्वीट किया था। इसमें उन्होंने सरकारी आवास को खाली करने की जानकारी दी थी। इसके बाद पंजाब की चार विधानसभा सीटों और दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस हाईकमान ने नवजोत सिंह सिद्धू को स्टार प्रचारकों की लिस्ट में शामिल किया था। हालांकि उन्होंने दोनों ही जगह चुनाव प्रचार से दूरी बना रखी थी।