पीपीपी के कांग्रेस के साथ चुनावी गठबंधन करने के फैसले के साथ ही साझा मोर्चा बिखरने के कगार पर पहुंच गया है।
माकपा की पंजाब इकाई के सचिव चरण सिंह विर्दी ने तो स्पष्ट कह दिया कि पीपीपी के इस फैसले के साथ ही साझा मोर्चा टूट गया।
वहीं, भाकपा की प्रदेश इकाई के सचिव बंत सिंह बराड़ ने कुछ नरमी बरतते हुए कहा कि फिलहाल औपचारिक तौर पर पीपीपी की तरफ से उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई है।
इसलिए मोर्चा अभी कायम है, लेकिन इतना जरूर कहा कि उनका कांग्रेस के साथ कोई समझौता नहीं है। साझा मोर्चा के चौथे घटक
मनप्रीत से बात नहीं : बलदेव
अकाली दल लौंगोवाल के सेक्रेटरी जनरल बलदेव सिंह मान का कहना है कि इस संबंध में पीपीपी अध्यक्ष मनप्रीत सिंह बादल से उनकी बात अभी नहीं हुई है। ताजा हालात पर उनके साथ विस्तृत विचार-विमर्श के बाद ही वह कोई टिप्पणी करने की स्थिति में होंगे।
चार सीटों पर लड़ेगी माकपा
माकपा के प्रदेश सचिव चरण सिंह विर्दी ने कहा कि साझा मोर्चा में हुई सीटों के बंटवारे के तहत उनके हिस्से श्री आनंदपुर साहिब और लुधियाना की सीटें आई थीं। अब पीपीपी व कांग्रेस का समझौता हो रहा है, तो माकपा संगरूर और जालंधर सीटों से भी अपने उम्मीदवार उतारेगी।
उन्होंने कहा कि साझा मोर्चा का गठन कांग्रेस और अकाली-भाजपा के खिलाफ हुआ था। अब जबकि पीपीपी ने कांग्रेस से हाथ मिलाने का निर्णय लिया है, तो मोर्चा खुद-ब-खुद टूट गया।
कांग्रेस से कोई समझौता नहीं : भाकपा
भाकपा के प्रदेश सचिव बंत सिंह बराड़ ने कहा कि उनकी पार्टी के बारे में कहा जा रहा है कि फरीदकोट सीट पर उनका कांग्रेस के साथ समझौता हो गया है, लेकिन यह झूठ है।
न तो उनकी और न ही भाकपा के किसी राष्ट्रीय नेता की कांग्रेस नेतृत्व के साथ इस संबंध में कोई बात हुई है।
साझा मोर्चा में हुए सीटों के वितरण के मुताबिक फिलहाल वह फिरोजपुर, फरीदकोट और अमृतसर से अपने प्रत्याशी उतारने जा रहे हैं, लेकिन यदि कोई नए समीकरण उभरते हैं, तो वह अधिक सीटों पर भी चुनाव लड़ सकते हैं।
भगवंत मान को मनाने की कोशिश
‘आप’ की जगह कांग्रेस से समझौते से नाराज पीपीपी उपाध्यक्ष भगवंत मान को मनाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। अध्यक्ष मनप्रीत बादल ने इस काम के लिए पार्टी के सेक्रेेटरी जनरल गुरप्रीत सिंह भट्टी की ड्यूटी लगाई है, जो कि उनसे बातचीत कर रहे हैं।
अटकलें लग रही हैं कि भगवंत मान पीपीपी छोड़कर ‘आप’ का दामन थाम सकते हैं, लेकिन मान ने इससे इंकार किया है। एक-दो दिन में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
लोकसभा सीट ही नहीं, सत्ता में भागीदारी भी मिलेगी पीपीपी को
पीपीपी की सेंट्रल कमेटी की शुक्रवार को हुई बैठक में यह बात भी हुई कांग्रेस से समझौता का पार्टी को बहुत फायदा होगा। केवल लोकसभा सीट ही नहीं, सत्ता में भागेदारी भी मिलेगी।
सूत्रों के अनुसार मनप्रीत बादल ने सेंट्रल कमेटी सदस्यों को बताया कि पीपीपी को राज्यसभा सीट या कुछ अन्य महत्वपूर्ण पद मिल सकते हैं।