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कैप्टन की ताजपोशी के साथ ही इन उदास आंखों में उम्मीद की चमक दिखी...

Fri, 17 Mar 2017 09:54 AM IST
अतुल सिन्हा/अमर उजाला, चंडीगढ़
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राहुल गांधी
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कैप्टन अमरिंदर सिंह की ताजपोशी के साथ ही पंजाब की सोंधी खुशबू कांग्रेस में नई ऊर्जा भरती हुई दिख रही है। उदास आंखों में एक चमक दिख रही है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के अप्रत्याशित नतीजे और हाथ में आते आते गोवा और मणिपुर के खो देने की कसक राहुल गांधी के चेहरे पर साफ झलकती है।
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पंजाब राजभवन में शपथग्रहण समारोह के दौरान जब मनमोहन सिंह के साथ राहुल पहुंचे तो ज्यादातर लोगों के पास खुद जाकर हाथ मिलाया, सबको मुबारकबाद दी फिर मनमोहन सिंह और वीरभद्र सिंह के साथ बैठ गए।

साथ बैठे अशोक गहलोत, आनंद शर्मा, कपिल सिब्बल, अंबिका सोनी, राज बब्बर जैसे नेताओं के चेहरे पंजाब के नतीजों से कुछ खिले से तो थे लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर भगवा लहर से उनमें बौखलाहट भी साफ दिख रही थी।
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आनंद शर्मा ने इसे बाद में कुछ इस अंदाज में जाहिर किया ‘न तो किसी की जीत कभी स्थायी होती है और न ही हार, इंतजार कीजिए।‘

राज्यपाल शपथ दिलाते गए, कैप्टन की सेना बनती गई

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह
राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर ने कैप्टन को शपथ दिलाई, फिर उनके सिपहसालारों में सबसे पहले मोहिंदरा आए फिर सिद्धू और मनप्रीत। एक-एक कर सभी नौ मंत्रियों ने शपथ ली।

मनप्रीत को छोड़कर सबने पहले कैप्टन को झुककर नमन किया, उनका आशीर्वाद लिया फिर राहुल के पास जाकर शुक्रिया अदा किया और फोटो खिंचवाई। लंबे समय के बाद सत्ता में आई कांग्रेस के सामने चुनौतियां तमाम हैं।

कैप्टन वैसे भी अपनी अंतिम पारी खेल रहे हैं, लेकिन उनकी ख्वाहिश है कि उनकी यह पारी पार्टी के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक नई जमीन तैयार करे। इसका संकेत भी उन्होंने आज दिया कि जो लोग कांग्रेस को कम करके देख रहे हैं, उनको वक्त के साथ जवाब मिल जाएगा।
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शपथ ग्रहण समारोह के एक और शोमैन रहे नवजोत सिद्धू

नवजोत सिंह सिद्धू
कैप्टन और राहुल के अलावा समारोह के एक और शोमैन रहे नवजोत सिद्धू। अपनी ठट्ठेदार हंसी और चुटीले अंदाज के लिए मशहूर इस मंत्री के चेहरे पर आज एक सहमा हुआ सा भाव था। उनकी तरफ से मोर्चा संभाल रखा था, उनकी पत्नी और पूर्व विधायक नवजोत कौर ने।

चाहे उप मुख्यमंत्री न बनाए जाने का सवाल हो या बीजेपी से कांग्रेस में आने का मसला या मनचाहे विभाग का मुद्दा, सिद्धू तो बोलने से बचते रहे, लेकिन नवजोत कौर ने सबके संतुलित जवाब जरूर दिए।

इस नए नवेले कांग्रेसी ने भी राहुल के आगे सिर नवाया और इस नई संस्कृति में खुद को ढालने की कोशिश करते रहे। अकाली आए नहीं, आप के विधायक आए तो बैठने की जगह नहीं मिल पाई।

समारोह सादा जरूर था लेकिन राजभवन में अफरा-तफरी फिर भी दिखी। धक्का-मुक्की में मनमोहन सिंह लड़खड़ाए तो राहुल ने उन्हें संभाला। थकी हारी कांग्रेस को भी अगर पंजाब ने कुछ इसी अंदाज में संभाल लिया तो बेशक कैप्टन की ये बड़ी उपलब्धि होगी।
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