-कच्चा माल खरीदेंगे 18 फीसदी पर, तैयार कर बिकेगा 5 फीसदी पर
-13 फीसदी फंसेगा रिफंड, व्यापारी बोले- तीन साल का रिफंड पेंडिंग
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सुरिंदर पाल
जालंधर। जीएसटी स्लैब के बदलने पर व्यापारी असमंजस की स्थिति में हैं। उनको कच्चा माल 18 फीसदी पर खरीदना पड़ेगा और तैयार माल 5 फीसदी पर बिकेगा। उद्यमियों का तर्क है कि हमारा 13 फीसदी जीएसटी रिफंड फंस जाएगा जो मिलेगा कब इसकी क्लीयर गाइडलाइन सामने नहीं आई है। उद्यमियों का तर्क है कि हमें तो 2023 तक रिफंड अभी तक नहीं मिला। हमारा मुनाफा भी 13 फीसदी नहीं होगा जो विभाग में फंस जाएगा।
इंडस्टि्रयल एस्टेट के प्रधान सूबा सिंह का कहना है कि पंजाब का कारोबार पहले ही प्रभावित है। यहां पर पाइप फिटिंग से लेकर हैंड टूल तक का कारोबार है जिसमें पिग आयरन का इस्तेमाल होता है। हम पिग आयरन अन्य प्रदेशों से मंगवाते हैं जिस पर हमें 18 फीसदी जीएसटी अदा कर खरीददारी करनी होगी। इस पिग आयरन से हम हैंड टूल व पाइप फिटिंग तैयार करवाएंगे। नई स्लैब में हमारी इंडस्ट्री के तैयार प्रोडक्ट पर 5 फीसदी जीएसटी लगेगा। यानी हमें 13 फीसदी विभाग से रिफंड लेना पड़ेगा। पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने केंद्र सरकार से पंजाब के 60 हजार करोड़ रुपये तुरंत जारी करने की मांग की है। यानी हमारा अगर सूबे का रिफंड फंसा हुआ है तो व्यापारियों का रिफंड भी फंसेगा ही। व्यापारियों को 60 दिन के भीतर रिफंड मिलना चाहिए लेकिन 2-2 साल बाद भी रिफंड हासिल नहीं होता है।
चार माह बाद आते हैं बिल
हैंड टूल निर्यातक एसोसिएशन के प्रधान गुरशरण सिंह का कहना है कि निर्यातकों का तो बुरा हाल होगा। हमारे बिल तो चार माह बाद आते हैं। दरअसल, हैंड टूल का ज्यादा निर्यात होता है। निर्यातक जब बिल तैयार करता है तो पोर्ट लेकर मंजिल तक पहुंचने में दो माह का समय आराम से लग जाता है। बिल हमारे तक पहुंचने और आगे रिटर्न भरी जाएगी फिर रिफंड का आवेदन होगा। हिसाब लगाओ करीब छह माह का समय लग जाता है। एक एक निर्यातक का करोड़ों रुपये रिफंड फंस जाएगा तो व्यापार कैसे चलेगा? इसकी दिक्कतों के बारे में केंद्रीय वित्त मंत्री को विस्तार से लिखा गया है कि इस समस्या का समाधान जल्द ही किया जाए। हमारी इंडस्ट्री तो आगे ही लिमिट लेकर चल रही हैं। पंजाब तो वैसे ही सीमावर्ती राज्य है। इंडस्ट्री कैसे आगे बढ़ेगी? वहीं, पंजाब सरकार का करोड़ों रुपये केंद्र सरकार के पास जीएसटी रिफंड का फंसा हुआ है जिसका नुकसान व्यापारियों को हो रहा है।