-ईडी की गिरफ्तारी को गैर कानूनी बताते हुए इसे रद्द करने की याचिका में थी मांग
-छौक्कर की सारी दलीलें खारिज, नियमित जमानत के लिए निचली अदालत में जाने की छूट
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
रियल एस्टेट कारोबारी और पूर्व विधायक धर्म सिंह छौक्कर को बड़ा झटका देते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। माहिरा ग्रुप से जुड़े कथित मनी लान्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार छोक्कर ने दलील दी थी कि ईडी ने उन्हें गैर-कानूनी तरीके से दिल्ली के एक होटल से पकड़ा था और उनके साथ मारपीट भी की थी, हालांकि अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार करने से इंकार कर दिया। जस्टिस त्रिभुवन दहिया की एकल पीठ ने कहा कि छौक्कर की गिरफ्तारी विधिवत रूप से की गई है। कोर्ट ने माना कि गिरफ्तारी से पहले ईडी अधिकारियों ने ग्राउंड्स आफ अरेस्ट और रीज़न्स टू बिलीव लिखित रूप में दर्ज किए और आवश्यक दस्तावेज आरोपित को सौंपे। इसके अलावा, गिरफ्तारी के आदेश और संबंधित मेमो को विशेष न्यायाधीश को भी अग्रेषित किया गया। ईडी की ओर से अदालत को बताया गया कि माहिरा इंफ्राटेक और अन्य कंपनियों के माध्यम से छौक्कर व उनके परिवार ने लगभग 363 करोड़ रुपये घर खरीदारों से वसूले, जिन्हें प्रोजेक्ट निर्माण में लगाने की बजाय व्यक्तिगत खर्चों, संपत्तियों की खरीद और अन्य कार्यों में मोड़ दिया गया। जब घर खरीदारों को समय पर फ्लैट नहीं मिले तो कई एफआईआर दर्ज हुईं। इन्हीं एफआईआर को आधार बनाकर ईडी ने वर्ष 2021 में जांच शुरू की। ईडी ने यह भी दलील दी कि छौक्कर और उनके बेटे बार-बार समन के बावजूद जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे। उनके खिलाफ कई बार गैर-जमानती वारंट जारी किए गए, परंतु गिरफ्तारी नहीं हो पाई। हाईकोर्ट ने धर्म सिंह द्वारा नियमित ज़मानत की मांग खारिज करते हुए कहा कि पहले सेशन कोर्ट में जाने के बाद ही हाईकोर्ट का रुख किया जा सकता है। हाईकोर्ट ने कहा कि निचली अदालत और हाईकोर्ट दोनों के पास नियमित जमानत देने का अधिकार है। लेकिन यह स्थापित सिद्धांत है कि पहले सेशन कोर्ट में आवेदन करना आवश्यक है। केवल असाधारण परिस्थितियों में ही सीधे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया जा सकता है।