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शिक्षकों के वाट्सएप ग्रुप में वीसी विरोधी नारे वाली फोटो पोस्ट करने पर घमासान

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शिक्षकों के वाट्सएप ग्रुप में वीसी विरोधी नारे वाली फोटो पोस्ट करने पर घमासान
सबहेड
एक शिक्षक ने डाली अखबार की कटिंग, कई शिक्षक बोले- ऐसे नारे नहीं लिखे जाने चाहिए
विवि कैंपस में यह मामला दिनभर चर्चा का विषय बना रहा
सुशील कुमार
चंडीगढ़। पीयू वीसी से संबंधित एक खबर और फोटो शिक्षकों के वाट्सएप ग्रुप में पोस्ट करने पर घमासान मच गया। एक शिक्षक की ओर से पोस्ट की गई खबर में प्रकाशित फोटो में पीयू वीसी के खिलाफ विवादित नारा लिखा हुआ था। इसके बाद कई घंटों तक इस पर बहस चली। बाद में यह प्रकरण सीनेट रिफॉर्म की ओर मुड़ गया। इस पर भी काफी बहस चलती रही। आखिर में कई शिक्षकों ने इस मुद्दे पर मोर्चा संभाला तो मैसेज भेजने बंद हो गए। मंगलवार को दिनभर चला यह प्रकरण पीयू में चर्चा का विषय बना रहा। इस बहस से यह बात साफ हो रही है कि शिक्षक सीनेट रिफॉर्म चाहते हैं।
पीयू के 300 से अधिक शिक्षकों का एक वाट्सएप ग्रुप बना हुआ है, जिसका नाम पीयू जीओ है। इस ग्रुप में सीनियर से लेकर जूनियर शिक्षक तक जुड़े हुए हैं। कुछ पूर्व वीसी भी इस ग्रुप में शामिल हैं। पीयू के अधिकारियों को भी इसमें जगह दी गई है। मंगलवार सुबह सवा आठ बजे एक शिक्षक ने एक अखबार की खबर की कटिंग पीयू जीओ वाट्सएप ग्रुप में पोस्ट की। उस खबर में प्रकाशित फोटो में एक व्यक्ति पंजाबी भाषा में लिखा एक पोस्टर पकड़े हुए खड़ा नजर आ रहा था, जिस पर पंजाब यूनिवर्सिटी के वीसी राजकुमार के खिलाफ विवादित नारा लिखा हुआ था। यह फोटो सोमवार को पीयू में पूर्व सीनेटरों व शिक्षकों की ओर से किए गए प्रोटेस्ट की थी। उसी में यह नारा लिखा गया था। जिस शिक्षक ने वाट्सएप ग्रुप में यह खबर डाली थी उसने उस नारे लिखे पोस्टर को रेड लाइन के जरिये इंगित किया और लिखा कि कि ऐसे नारे का प्रयोग गलत है। यानी ऐसे नारे शोभा नहीं देते।
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इसके बाद एक सीनियर शिक्षक ने संदेश लिखा। उसमें नाम लिए बिना लिखा कि वीसी न तो पंजाब से हैं और न ही पीयू में उन्होंने पढ़ाया है। यह संदेश पढ़कर दूसरे शिक्षक ने लिख दिया कि देश में जो व्यक्ति रहता है तो वह कहीं भी नौकरी कर सकता है। उसी के साथ लिख दिया कि जो पीयू की गवर्निंग बॉडी में हैं क्या उन्होंने पीयू में पढ़ाया है। इसका जवाब सीनियर शिक्षक ने दिया कि क्या आप पंजाब से हैं। इस पर दूसरे शिक्षक ने कह दिया कि वह इंडिया से हैं। इस बात का कई शिक्षकों ने समर्थन किया और बहस गवर्निंग बॉडी सीनेट की ओर बढ़ गई। काफी देर तक बहस हुई। सीनियर शिक्षक ने यह भी कहा कि गवर्निंग बॉडी को न चाहते वालों को पीयू छोड़ देना चाहिए। हालांकि बाद में घमासान तेज हुआ तो दूसरी तरफ से संदेश आने कम हो गए और विवाद खत्म हुआ। हालांकि दिनभर यह विषय चर्चा का रहा।
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