पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड की अनदेखी करते हुए शहर के सरकारी अस्पतालों में भर्ती प्रसूताओं को समय से पहले छुट्टी दी जा रही है जबकि विशेषज्ञों के अनुसार तय मानक के अनुसार प्रसूता और नवजात का अस्पताल में रुकना बेहद जरूरी है। क्योंकि उस दौरान उन्हें संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा होता है।
गर्भवतियों और नवजात की सुरक्षा को लेकर स्वास्थ्य विभाग अनदेखी का रवैया अपनाए हुए है।
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स्थिति यह है कि पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड की अनदेखी करते हुए शहर के सरकारी अस्पतालों में भर्ती प्रसूताओं को समय से पहले छुट्टी दी जा रही है जबकि विशेषज्ञों के अनुसार तय मानक के अनुसार प्रसूता और नवजात का अस्पताल में रुकना बेहद जरूरी है। क्योंकि उस दौरान उन्हें संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा होता है। लेकिन विभाग ने इसके महत्व को समझे बिना 2015 से 2023 के बीच 73000 से ज्यादा महिलाओं को डिलीवरी के बाद दो दिन से पहले अस्पताल से छुट्टी दे दी। यह चौंकाने वाला मामला सेंट्रल ऑडिट की रिपोर्ट में सामने आया है, जिसमें ऑडिट टीम ने आपत्ति जताते हुए इसका कारण पूछा।
जवाब में बताया गया कि ज्यादातर मामलों में महिलाओं ने मजदूरी का हवाला देकर जल्दी छुट्टी करने की जिद की, जिसके कारण उन्हें 2 दिन से पहले अस्पताल से डिस्चार्ज करना पड़ा। इस जवाब पर ऑडिट टीम ने आपत्ति जताई है क्योंकि मानकों का पालन सुनिश्चित करना विभाग की जिम्मेदारी है।