चंडीगढ़ के सेक्टर 32 के सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की इमरजेंसी में स्थिति खराब है। गंभीर मरीजों के इलाज के लिए पहुंचे परिजन परेशान हैं। कारण इमरजेंसी में कागजी कार्रवाई पूरी करते-करते उनकी स्थिति खराब होना है।
आलम यह है कि इमरजेंसी में फाइल बनवाने और शुल्क जमा करने के लिए महज एक-एक काउंटर है। उन काउंटरों पर हमेशा 20 से 25 लोग लाइन में लगे होते हैं। ऐसे में अगर कोई एकमात्र सदस्य ही अपने मरीज के साथ हो तो उसे लाइन में लगे हुए बेहद तनाव से गुजरना पड़ रहा है क्योंकि वह अपने मरीज को स्ट्रेचर पर तड़पता छोड़ काउंटर पर खड़ा होता है। उस दौरान वे किसी से आग्रह भी नहीं कर पाता, क्योंकि लाइन में लगे सभी लोगों की स्थिति एक सी होती है। हालांकि अस्पताल प्रशासन का कहना है कि कागजी कार्रवाई पूरी होने के दौरान मरीज का इलाज प्रभावित नहीं होता।
इमरजेंसी में शुल्क जमा करने और फाइल बनवाने वाले काउंटर पर महिला और पुरुष को एक ही लाइन में लगना पड़ रहा है। लाइन में लगी महिलाएं परेशानी झेलकर वहां खड़ी रहने को मजबूर हैं क्योंकि उस समय उनके लिए अपने मरीज की जान बचाने के सिवा और कोई चीज महत्वपूर्ण नहीं होती। हालांकि वे इस व्यवस्था से निराश तो होती हैं लेकिन लाइन से हटने का निर्णय भी नहीं ले पातीं। अस्पताल के कर्मचारियों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन को इस ओर सोचने की जरूरत है।
मरीज और तीमारदार परेशान, कोई सुनवाई नहीं
सरकारी अस्पताल में कहने के लिए मरीजों को सुविधाएं दी जाती हैं। हकीकत में वहां सबसे ज्यादा धक्के खाने पड़ते हैं। इसलिए परिजन खेत बेचकर मरीज का निजी अस्पताल में इलाज कराने के लिए तैयार हो जाते हैं। अब जीएमसीएच-32 की इमरजेंसी ही देख लीजिए, शुल्क जमा करने में तो गंभीर मरीज की जान ही चली जाएगी।
-दिनेश कुमार, लुधियाना
मरीज तड़पता रहे पर पहले चाहिए कागजी कार्रवाई
इमरजेंसी में तो मरीजों की क्षमता के अनुसार काउंटर होने चाहिए जिससे मिनटों में काम हो जाए। जीएमसीएच- 32 में तो अलग ही व्यवस्था है। एक-एक काउंटर पर लंबी कतार लगी हुई है। मरीज स्ट्रेचर पर तड़प रहा है, लेकिन बिना कागजी कार्रवाई पूरी किए बिना कोई सुनवाई नहीं है।
-अवतार सिंह, हिमाचल
इमरजेंसी में मरीजों को तत्काल इलाज देने की व्यवस्था है। जहां तक कागजी कार्रवाई की बात है तो ये उनकी सहूलियत के लिए किया जाता है। अगर काउंटर पर भीड़ की वजह से परेशानी हो रही है तो उसकी संख्या बढ़ाने पर विचार किया जाएगा।
- डॉ. सुधीर गर्ग, चिकित्सा अधीक्षक जीएमसीएच-32