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चार साल बाद कंप्यूटर शिक्षकों और लैब सहायकों को मिला तोहफा, वेतन में हुई वृद्धि

Mon, 01 Apr 2019 09:48 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : social media
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हरियाणा के सरकारी स्कूलों में कार्यरत कंप्यूटर शिक्षकों और लैब सहायकों को प्रदेश सरकार ने नए वित्त वर्ष के पहले दिन ही बड़ा तोहफा दिया है। कंप्यूटर शिक्षकों के वेतन में चार साल बाद सरकार ने पांच हजार रुपये की बढ़ोतरी की है, जबकि लैब सहायकों का वेतन भी पांच साल बाद तीन हजार रुपये बढ़ाया है। कंप्यूटर शिक्षकों को अब दस हजार रुपये की जगह पंद्रह हजार रुपये व लैब सहायकों को छह हजार के बजाए नौ हजार रुपये मिलेंगे। 

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सरकार ने इनका अनुबंध भी 31 मार्च 2020 तक बढ़ा दिया है। सोमवार को प्रदेश सरकार ने इसके आदेश जारी कर दिए। चुनाव आयोग ने बीते 30 मार्च को इसकी मंजूरी दे दी थी, इसके बाद सरकार ने वेतन व अनुबंध बढ़ाने के आदेश जारी किए हैं। स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से बीते महीने मुख्य सचिव डीएस ढेसी की अध्यक्षता में हुई स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में ये मामले प्रस्तुत किए गए थे। 

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जिन्हें कमेटी ने हरी झंडी देते हुए भारत निर्वाचन आयोग के पास अंतिम निर्णय के लिए भेजा था। अतिरिक्त मुख्य सचिव स्कूल शिक्षा पीके दास ने बताया कि स्कूलों में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी योजना (आईसीटी) के तहत सर्विस एजेंसी के माध्यम से रखे गए कंप्यूटर स्टाफ और कंप्यूटर लैब अटेंडेंट की कार्य अवधि को आउटसोर्स पॉलिसी अनुसार एक अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2020 तक बढ़ाया गया है। इसके अलावा वेतन में भी वृद्धि की गई है। 

कंप्यूटर शिक्षक खुशी के साथ निराश भी
कंप्यूटर शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन ने इसके लिए जहां प्रदेश सरकार का धन्यवाद किया है। वहीं सीएम की घोषणा अनुसार कंप्यूटर शिक्षकों को 21715 रुपये और लैब सहायकों को 11 हजार रुपये वेतन न दिए जाने पर निराशा भी जताई है। एसोसिएशन के प्रेस प्रवक्ता सुरेश नैन ने बताया कि सितंबर 2013 में उनकी नियुक्ति प्राइवेट कंपनी के तहत स्कूलों में हुई थी।

 शुरू में उनका वेतन 14429 रुपये निर्धारित किया गया था, जिसमें 2400 रुपये कंपनी की कमीशन थी। कंपनी ने शिक्षकों का खूब शोषण किया। समय पर वेतन न देने के अलावा गर्मी व सर्दी की छुट्टियों की राशि भी काट ली गई। इसे लेकर शिक्षकों ने आंदोलन किया तो फरवरी 2015 में उन्हें शिक्षा विभाग ने अपने अधीन लिया। उस समय दस हजार रुपये वेतन तय किया गया था। 
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