टीचर को फेसबुक पर जाति विशेष के खिलाफ टिप्पणी करना महंगा पड़ गया। इस हरकत का उसने वो अंजाम भुगता कि अब भूलकर भी ऐसा नहीं करेगा। दरअसल, फेसबुक पर जाति विशेष को लेकर की गई टिप्पणी के मामले में दर्ज एफआईआर के खिलाफ शिक्षक ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की शरण ली है। हाईकोर्ट ने याचिका पर हरियाणा सरकार सहित अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
याचिका दाखिल करते हुए शिक्षक सरफराज अंजुम की ओर से एडवोकेट मोहम्मद अरशद ने हाईकोर्ट के सामने दलीलें रखीं। अरशद ने कहा कि याचिकाकर्ता की नियुक्ति 2011 में हुई थी और तब से लेकर अब तक उनका कैरियर बेदाग रहा है। अभी तक एसीआर में ज्यादातर एंट्री एक्सीलेंट की हैं। इस मामले में राजनीति चमकाने के लिए उनकी पोस्ट को मुद्दा बनाया जा रहा है। याचिकाकर्ता ने कहा कि यह एफआईआर दो समुदायों के बीच तनाव पैदा कर उसका राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास है, जो पूरा नहीं होने देना चाहिए।
एफआईआर के बाद टीचर सस्पेंड किया गया
FB पर जाति विशेष के खिलाफ टिप्पणी
याची ने कहा कि इस मामले के बाद उसको सस्पेंड भी कर दिया गया, जो गलत है। जो टिप्पणी याचिकाकर्ता ने फेसबुक पर डाली थी वह कॉपी पेस्ट थी। जो टिप्पणी की गई थी वह सामान्य वर्ग में बेहद साधारण थी। किसी भी प्रकार की गाली या अभद्रता का प्रयोग नहीं था। याची ने बताया कि इसके बाद एक पंचायत भी बुलाई गई थी, जिसमें 36 बिरादरी शामिल थी, लेकिन तब भी गाली-गलौच की कोई बात नहीं हुई।
इस मामले में याची को फंसाने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में रोशन लाल व अन्य की ओर से दर्ज 9 मार्च 2017 की एफआईआर रद्द की जाए। हाईकोर्ट ने याचिका पर हरियाणा सरकार व अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब कर लिया है।
यह है मामला
याचिकाकर्ता शिक्षा विभाग में कंप्यूटर शिक्षक है। उसने फेसबुक पर एक पोस्ट डाली। इस पोस्ट में कथित तौर पर एक जाति विशेष के लिए अपमानजनक टिप्पणी थी। मामला तब और अधिक गंभीर हो गया, जब इसे राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया। इसके बाद 28 फरवरी 2017 को याची को सस्पेंड कर दिया गया और 9 मार्च को उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दी गई।