कार ठीक होने तक पॉलिसी के मुताबिक कोई वैकल्पिक वाहन की व्यवस्था न करना सेवा में कोताही है। यह कहना है उपभोक्ता फोरम का।
फोरम ने दादा मोटर्स और जगुआर लैंड रोवर को सेवा में कोताही का दोषी करार देते हुए निर्देश दिया है कि वह संयुक्त रूप से शिकायतकर्ता को टैक्सी किराए के रूप में दो लाख 75 हजार रुपये अदा करें।
सेवा में कोताही के लिए एक लाख मुआवजा और 10 हजार रुपये मुकदमा खर्च अदा करना होगा। यह निर्देश जिला उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम-2 के सदस्य प्रीति मल्होत्रा ने सुनवाई के बाद दिया है।
शिकायतकर्ता दविंदर बिंदल निवासी एनएसी मनीमाजरा चंडीगढ़ ने साहनेवाल जिला लुधियाना और इंडस्ट्रियल एरिया फेज-2 चंडीगढ़ स्थित दादा मोटर्स प्राइवेट लिमिटेड और मुंबई स्थित जगुआर लैंड रोवर के खिलाफ उपभोक्ता फोरम में शिकायत दी थी। शिकायतकर्ता ने फोरम को दी शिकायत में कहा कि वह उद्योगपति हैं।
सोसायटी में प्रतिष्ठा के लिए उन्होंने इंडस्ट्रियल एरिया फेज-2 चंडीगढ़ स्थित दादा मोटर्स से 15 सितंबर, 2012 में 78 लाख 42 हजार 97 रुपये में जगुआर लैंड रोवर कार खरीदी। इसका बीमा कराया और प्रीमियम के रूप में एक लाख छह हजार 423 रुपये अदा किए।
उन्होंने बताया कि दूसरे पक्ष से समय पर कार की सर्विसिंग 26 मार्च, 2013 और 21 सितंबर, 2013 को कराई गई। दो अक्तूबर, 2013 को वह परिवार के साथ यात्रा कर रहे थे, शाम में करीब साढ़े 6.20 बजे चंडीगढ़-अंबाला हाईवे पर अचानक कार बंद हो गई। उन्होंने इसकी सूचना दादा मोटर्स को दी।
कार को इंडस्ट्रियल एरिया स्थित दादा मोटर्स की सर्विस सेंटर में लाई गई। पॉलिसी के अनुसार उन्हें वैकल्पिक तौर पर अन्य कार नहीं दी गई। इसके बाद उन्होंने छह हजार दो सौ रुपये प्रतिदिन की दर से किराए पर टैक्सी ली। इस पर उनका दो लाख 75 हजार रुपये खर्च हुए। कार में मैन्यूफैक्चरिंग डिफेक्ट थी। जब इसका पता चला तो कंपनी की ओर से उन्हें 21 नवंबर को विकल्प के तौर पर कार दी गई।
दिसंबर 2013 के अंतिम सप्ताह में कार ठीक कर उन्हें भेज दी गई और कहा गया कि अब कोई खराबी नहीं है। लेकिन कार 18 जनवरी, 2014 को कीचड़ में फंस गई और नहीं निकल नहीं। जबकि अन्य कारें आसानी से निकलती रहीं।
उनकी कार को ट्रैक्टर की सहायता से निकाली गई। दूसरे पक्ष ने उपभोक्ता फोरम को बताया कि उन्होंने सेवा में कोताही नहीं की है। कार में कोई मैन्यूफैक्चरिंग डिफेक्ट नहीं थी।