देरी से ही सही लेकिन मेट्रो प्रोजेक्ट एक कदम और आगे बढ़ गया है। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय (एमओयूडी) ने चंडीगढ़ में मेट्रो चलाने के लिए कंपनी गठन को मंजूरी दे दी है।
ग्रेटर चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट कार्पोरेशन (जीसीटीसी) नाम से यह स्पेशल परपज व्हीकल (एसपीवी) बनाया जाएगा। 100 करोड़ से यह कंपनी बनेगी।
कंपनी का अपना ही एकाउंट होगा। एसपीवी का नाम मंजूरी के लिए यूटी प्रशासक को भेज दिया गया है। यूटी प्रशासक की मंजूरी मिलते ही जीसीटीसी अपना काम शुरू कर देगी। मंजूरी के बाद सबसे पहले इसको चलाने वाले बोर्ड का गठन किया जाएगा। बोर्ड में पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और केंद्र सरकार के दो-दो प्रतिनिधि यानी कुल आठ सदस्य होंगे। बोर्ड केचेयरपर्सन का कार्यभार मंत्रालय का कोई अधिकारी ही संभालेगा। जीसीटीसी में चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा और एमओयूडी का 25-25 प्रतिशत हिस्सा होगा।
पूरे प्रोजेक्ट के लिए केंद्र देगी 50 प्रतिशत बजट
चंडीगढ़ केसाथ मेट्रो मोहाली और पंचकूला को भी कवर करेगी। ऐसे में पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और केंद्र सरकार पूरे प्रोजेक्ट में पार्टनर हैं। बात फंड की करें तो पूरे प्रोजेक्ट फंड का 50 प्रतिशत केंद्र सरकार, 25 प्रतिशत चंडीगढ़ प्रशासन और बचा 25 प्रतिशत पंजाब और हरियाणा को देना है। हालांकि पंजाब और हरियाणा पूरे प्रोजेक्ट पर अपनी लिखित सहमति पहले ही दे चुकेहैं। जो डीपीआर तैयार हुई है उसमें प्रोजेक्ट का एस्टीमेट बजट 13,909 करोड़ रुपये बताया गया है।
चार साल की देरी, चार
प्रोजेक्ट में देरी के कारण बजट एस्टीमेट लगातार बढ़ रहा है। पहले ही यह प्रोजेक्ट चार साल की देरी के कारण 3 हजार करोड़ महंगा हो गया है। सबसे पहले प्रशासन ने 2012 में मेट्रो के लिए डीपीआर तैयार की थी जो 10,900 करोड़ की थी। अब प्रोजेक्ट 13,909 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।