विशेषज्ञों से ज्यादा आम लोग नशा छुड़वाने में ज्यादा प्रभावी साबित हुए हैं। मादक द्रव्यों का सेवन छुड़वाने पर शोध कर रहीं पुडुचेरी विश्वविद्यालय की प्रो. नलिनी रंगनाथन के शोध में यह खुलासा हुआ है।
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की ओर से फंडिड प्रो. नलिनी ने अपने रिसर्च प्रोजेक्ट में पॉजिटिव डीविंएट के सिद्धांत को चेक किया। सिद्धांत में नशे के आदी व्यक्ति को उसके समुदाय के ही लोग अपने अनुभव और सफलता की कहानी साझा कर जीवन के स्वस्थ विकल्प को अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्हें नशे के नुकसान बताने के बजाए स्वस्थ और खुशहाल जीवन से रूबरू करवाया जाता है।
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दिसंबर 2022 से अप्रैल 2023 तक 32 कॉलेज विद्यार्थियों ने पुडुचेरी के चार समुदायों में बतौर पॉजिटिव डीविएंट लीडर काम किया। विद्यार्थियों ने हर शनिवार और रविवार को मादक द्रव्यों पर समुदाय में जागरूकता सत्र, खेल प्रतियोगिता, समूह चर्चा आदि गतिविधियों की और साथ ही नॉलिज, एप्टीट्यूड और पर्सेप्शन सर्वे किया। विद्यार्थियों द्वारा की गतिविधि और सर्वे की रिपोर्ट तैयार की गई जिसके अध्ययन में सिद्धांत के सकारात्मक परिणाम देखने को मिले। शोध के दूसरे भाग में उन लोगों की केस स्टडी की जाएगी जो अपने समुदाय में नशा छुड़वाने के लिए लोगों में जागरूकता लाने पर काम कर रहे हैं।
प्रो. नलिनी ने बताया पंजाब और पुडुचेरी में मादक द्रव्यों खास कर शराब का सेवन करने वाले लोगों की संख्या बहुत अधिक है। पुडुचेरी की तरह पंजाब में भी इस मेथड को अपनाया जा सकता है। पॉजिटिव डीविएंस अपरोच को यूएन वुमन ने भी विभिन्न मुद्दों के समाधान में अपनाया है।
पंजाब की 10 प्रतिशत आबादी शराब की आदी
2.7 करोड़ की आबादी वाले पंजाब में 10 प्रतिशत लोग शराब के आदी हैं जो भावनात्मक, सामाजिक और आर्थिक कई तरह की समस्याओं का सामना कर रहे हैं। 10 साल से लेकर 75 वर्ष की आयु के लोग मादक द्रव्यों का सेवन कर रहे हैं।शराब, भांग, गांजा और चरस के सेवन करने में पंजाब का नाम देश के टॉप पांच राज्यों में शामिल है। 5.7 लाख लोगों को भांग, चरस और गांजा सेवन की लत खोखला कर रही है। वहीं 7.2 लाख लोग अफीम, हेरोइन और फार्मास्यूटिकल नशे के आदी हैं। डाटा सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के मैग्निट्यूड ऑफ सबस्टान्स अब्यूज इन इंडिया 2019 की रिपोर्ट से हैं, जिसमें हर राज्य में मादक द्रव्यों के सेवन और पैटर्न की विस्तृत जानकारी दी है।