इसलिए है विरोध
एक साल पहले भी हरियाणा सरकार ने कामन कैडर को लागू करने की कोशिश की थी लेकिन पीजीआई की टीचर्स एसोसिएशन और अन्य कर्मचारियों के विरोध के चलते इसे लंबित छोड़ दिया था। दरअसल, नियमित डॉक्टर और कर्मचारी इस पॉलिसी का विरोध इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि उनका तर्क है कि जब उनकी नियुक्ति हुई थी तो उन्हें संबंधित मेडिकल कॉलेज ही स्टेशन बताया गया था। अब कई कई साल से सेवा देने के चलते उन्हीं शहरों में कर्मचारियों और डॉक्टरों ने अपने मकान आदि बना लिए हैं। दूसरा तर्क ये है कि अगर सभी का एक समान कैडर बना तो इससे काफी संख्या में कर्मचारियों की सीनियरिटी प्रभावित होगी। दोबारा से कामन कैडर लागू होता है तो इसका विरोध तय है।
इसलिए पड़ी कामन कैडर की जरूरत
हरियाणा सरकार की मंशा है कि प्रदेश के हर जिले में मेडिकल कॉलेज स्थापित किया जाए। नौ जिलों में मेडिकल कॉलेज बनाए जा रहे हैं। अगले सत्र से जींद, भिवानी और नारनौल में मेडिकल कॉलेज शुरू करने हैं। यहां पर नए स्टाफ की नियुक्ति की प्रक्रिया लंबी है। इसलिए सरकार चाहती है कि पहले से ही मेडिकल कॉलेज और पीजीआई में तैनात स्टाफ डॉक्टरों व कर्मचारियों को इन कॉलेजों में तबादला करके भेजा जाए। फिलहाल अलग-अलग मेडिकल कॉलेज के अलग-अलग सेवा नियम हैं, इसमें मुख्यालय को परेशानी झेलनी पड़ती है। सरकार चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान में एक समान सेवा नियम बनाए जाएंगे।