करीब छह माह पहले पुलिस ने 100 करोड़ रुपये की कोकीन पकड़ने का जो दावा किया था, सीएफएसएल की रिपोर्ट में वह गलत साबित हुआ। असल में यह एफिड्रिन नाम का पदार्थ है जो दवा बनाने में इस्तेमाल होता है। इस जांच रिपोर्ट के साथ पुलिस ने चार्जशीट फाइल कर दी। इसके बाद दो आरोपियों विजय कुमार और जफर शरीफ ने जमानत अर्जी दायर की, जिस आधार पर दोनों को कोर्ट से जमानत मिल गई।
पहले पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट की धारा 21 के तहत केस दर्ज किया था, जिसमें कम से कम 10 साल और अधिकतम 20 साल सजा का प्रावधान है। अब चार्जशीट में पुलिस ने आरोपियों पर लगी धारा 21 हटाकर एनडीपीएस एक्ट की धारा 9 ए और 25 ए लगा दी है। सेक्शन 25ए में कम से कम सजा का उल्लेख नहीं है लेकिन अधिकतम 10 साल सजा हो सकती है।
क्या था मामला
13 मई 2021 को अशफाक रहमान नामक शख्स को कोकीन की बड़ी खेप के साथ पुलिस ने गिरफ्तारी का दावा किया था। इस बारे में पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर खुलासा भी किया था। इसी आधार पर विजय कुमार और जफर शरीफ को पुलिस ने चेन्नई से काबू किया था। यह खेप चेन्नई से चंडीगढ़ ट्रेन के जरिये पहुंची थी, इसे ऑस्ट्रेलिया भेजा जाना था। इससे पहले ही एसएचओ सेक्टर 31 नरेंद्र पटियाल की टीम ने दबिश देकर इसे बरामद कर लिया था।
पुलिस ने अशफाक अहमद को गिरफ्तार किया उसके बयान पर दो अन्य आरोपियों विजय कुमार और जफर शरीफ को काबू किया था। इन तीनों पर पुलिस ने एनडीपीएस सेक्शन 21 के तहत केस दर्ज करते हुए पकड़ी गई कोकीन को सीएफएसएल भेजा था। अब सीएफएसएल ने जो रिपोर्ट तैयार की है उसमें सामने आया कि वह कोकीन के बजाय एफिड्रिन है।