पंजाब मंत्रीमंडल ने सभी धर्मों के पवित्र ग्रंथों की बेअदबी करने पर उम्रकैद की सजा तय करने के लिए सीआरपीसी और आईपीसी की धारा में संशोधन करने की मंजूरी दे दी है। इससे राज्य में पवित्र ग्रंथों की बेअदबी की घटनाओं को रोकने और सांप्रदायिक सदभाव बनाए रखने में सफलता मिलेगी। कैबिनेट द्वारा पारित इस प्रस्ताव को आगामी विधानसभा सत्र में पारित करके राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में मंगलवार को हुई मंत्रीमंडल की बैठक मीटिंग के दौरान यह फ़ैसला लिया गया। इसके साथ ही मंत्रीमंडल ने विधानसभा के इस हफ्ते शुरु हो रहे सत्र के दौरान पेश किए जाने वाले विभिन्न बिलों को भी मंज़ूरी दे दी।
सरकारी प्रवक्ता के मुताबिक, मंत्रीमंडल ने लोगों की धार्मिक भावनाओं के ठेस पहुंचाने और किसी भी धार्मिक स्थल को अपवित्र करने के मामले में आईपीसी की धारा 295-ए के तहत मौजूदा दो साल की सजा को बढ़ाकर दस साल करने संबंधी संशोधन को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही आईपीसी की धारा 295-एए के तहत पवित्र ग्रंथों- श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी, श्रीमद भगवद गीता, पवित्र कुरान और पवित्र बाइबल को नुकसान पहुंचाने या बेअदबी करने के दोषी को उम्रकैद की सजा देने संबंधी संशोधन को मंजूरी दे दी।
मंत्रीमंडल ने कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर (पंजाब अमैंडमेंट) बिल-2016 (बिल नंबर- 7 पीएलए-2016) और इंडियन पैनल कोड (पंजाब अमेंडमेंट) बिल-2016 (बिल नंबर-7 पीएलए-2016) को वापस लेने का फ़ैसला किया है, जो साल 2016 में 14वीं विधानसभा के 12वें सत्र में पास किये गए थे। इसके साथ ही ‘द कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर (पंजाब अमैंडमैंट) बिल -2018 और इंडियन पैनल कोड (पंजाब अमैंडमैंट) बिल -2018 को आगामी सत्र के दौरान पेश करने की स्वीकृति दी गई।