अमर उजाला संवाद पंजाब के सत्र में देहात स्टार्टअप के को-फाउंडर श्याम सुंदर ने बताया कि उनका प्लेटफार्म किसानों की हर जरूरत को पूरा कर रहा है। उनका स्टार्टअप किसानों के लिए 360 डिग्री पर काम करता है। किसानों को खेती के लिए जो भी चाहिए होता है, हम उसे उपलब्ध करवाते हैं। चाहे वह खाद हो या खेती के लिए कोई औजार या मशीन। उन्होंने बताया कि जिस तरह से ढाई कोस के बाद यहां भाषा बदल जाती है, वहीं ढाई कोस चलने के बाद खेती का तरीका बदल जाता है। एक फसल के लिए अलग-अलग तरीके हैं। खेती की जो तकनीक विदेश में है, उसे हम भारत में
लागू नहीं कर सकते। भारत में खेती के लिए सैकड़ों तकनीक हैं। यह एक तरह से संभावनाएं और चुनौती हैं। उन्होंने बताया कि कुछ गांवों के बीच उनका देहात सेंटर है जो किसानों के बीच रहकर काम करता है। यह एक तरह से नब्ज का काम करता है। इससे हम जमीन पर रहकर किसानों की जरूरतों को समझते हैं और उन्हें सही समय पर सलाह देते हैं।
उन्होंने बताया कि जिन किसानों के पास मोबाइल है, उनके साथ देहात स्टार्टअप एप के साथ जुड़ता है और जिनके पास मोबाइल नहीं हैं, उनके साथ हम देहात सेंटर के जरिये जुड़ते हैं। हमने देहात स्टार्टअप के गांवों में देहात सेंटर बना रखे हैं। इस देहात सेंटर के जरिये हम उन किसानों के साथ जुड़ते हैं जो मोबाइल फोन व तकनीक का इस्तेमाल नहीं करते। उन्होंने बताया कि उनका मॉडल सभी किसानों के लिए है।
डिजिटल क्रांति से खेती के तरीके बदले
श्याम सुंदर ने बताया कि डिजिटल क्रांति ने खेती पर प्रभाव डाला है। इससे बहुत बड़ा परिवर्तन आ रहा है। डिजिटल क्रांति का सबसे बड़ा फायदा खेती को होने वाला है, क्योंकि एग्रीकल्चर की फील्ड काफी विशाल और जटिल है। डिजिटल क्रांति की वजह से ही खेती के तौर तरीकों में काफी बदलाव आया। इसका फायदा भी किसानों को ही मिल रहा है।
छुट्टियां भी किसानों के बीच बीतती है
किसानों की तकदीर बदलने वाले देहात स्टार्टअप के को-फाउंडर ने बताया कि उनका जुनून है कि वह किसानों के लिए काम करें। दिन रात वह किसानों के बारे में सोचते रहते हैं। वीकेंड भी किसानों के बीच गुजरता है। उन्होंने बताया कि उनकी कोशिश है कि किसानों के दरवाजे तक जाएं। किसानों से मिले। जब तक किसानों से बात नहीं करेंगे कि उन्हें क्या चाहिए। उनकी समस्या क्या हैं तब तक हम उनका समाधान नहीं ढूंढ पाएंगे।