भाजपा मुफ्त की रेवड़ियों के खिलाफ रही है, पर इस बार महिलाओं को 21 सौ रुपये हर महीने और 500 रुपये में गैस सिलिंडर देने की घोषणा कर रही है। हरियाणा की वित्तीय स्थिति इतनी ठीक नहीं है। योजनाओं को कैसे लागू करेंगे। इसका क्या रोडमैप है?
हमारे पास पूरे संसाधन मौजूद हैं। रोडमैप तैयार करने के बाद ही इसे संकल्प पत्र में शामिल किया है। यदि आप देखें तो 2014 और 2019 के संकल्प पत्र में किए गए वादों को भाजपा ने सौ फीसदी धरातल पर उतारा है। 2024 के संकल्प पत्र को भी हूबहू धरातल पर उतारेंगे
भाजपा हमेशा से परिवारवाद के खिलाफ रही है। इसके बावजूद दस नेताओं के पारिवारिक सदस्यों को टिकट दिया गया है?
देखिए यह परिवारवाद नहीं है। परिवारवाद की परिभाषा तो यह है कि जवाहर लाल नेहरू के बाद राजीव गांधी, सोनिया गांधी और फिर राहुल गांधी। राहुल गांधी अध्यक्ष भी बनना चाहते हैं और प्रधानमंत्री पद के दावेदार बने रहना चाहते हैं। इसके बाहर की सोच इस परिवार की नहीं है। इन लोगों ने हरियाणा में भी इसी तरह के हालात बना दिए हैं। हरियाणा में हुड्डा ही सब कुछ हैं। इन लोगों ने अशोक तंवर, किरण चौधरी और कुमारी सैलजा को किनारे लगा दिया। इसी तरह से क्षेत्रीय दल इनेलो, जजपा और सपा में भी परिवारवाद है। यदि कोई अपना बच्चा मेहनत कर रहा है तो उसे टिकट देना हम परिवारवाद नहीं मानते। परिवारवाद का मतलब तो यह है कि एक दल को चलाने वाला एक ही परिवार है, जो अपनी मनमर्जी करता है। पंजाब का शिरोमणि अकाली दल भी परिवारवाद का शिकार हुआ है और वरिष्ठ नेता छोड़कर चल गए।
सीएम पद से इस्तीफा देने के बाद केजरीवाल का पूरा फोकस अब हरियाणा में होने वाला है। वह भाजपा को कितनी टक्कर दे पाएंगे, असर होगा आप का?
किसी दल के आने से कोई असर नहीं होगा। कोई टक्कर नहीं है। वह खुद से नहीं आए हैं। कोर्ट ने जब उनसे कहा कि आपको मुख्यमंत्री पद छोड़ना होगा और घर भी खाली करना होगा, उसके बाद यहां आए। वरना वह तो सीएम की कुर्सी लेकर जेल चले गए थे। जो व्यक्ति यह कहता हो कि मैं कट्टर ईमानदार हूं और वह भ्रष्टाचार के दलदल में फंस गया हो, उस पर कौन विश्वास कर सकता है। आतिशी को मैंने बधाई दी और कहा था कि केजरीवाल की तरह मत चलना। उसने दिल्ली की जनता का बहुत शोषण किया।
लेकिन वह तो कहते हैं कि हरियाणा में आप किंगमेकर होगी इस बार?
वह भ्रष्टाचार के किंगमेकर बनेंगे। इन्होंने भ्रष्टाचार में कांग्रेस को भी पीछे छोड़ दिया है। सत्ता में आने से पहले वह कहते थे कि अगर हमारे किसी मंत्री पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा तो तुरंत इस्तीफा दिलवाकर जांच करवाएंगे। लेकिन जब खुद पर आरोप लगा तो कुर्सी नहीं छोड़ी। कोर्ट के आदेश के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया है। हमने केजरीवाल से कहा कि पंजाब में आपकी पार्टी की सरकार है। हरियाणा को एसवाईएल का पानी दिलवा दो, लेकिन हाथी के दांत खाने के और दिखाने के और। हरियाणा में आकर कुछ कहते हैं और पंजाब में कुछ।
अमित शाह कह चुके हैं कि भाजपा सरकार आई तो आप सीएम होंगे। इसके बावजूद राव इंद्रजीत और अनिल विज सीएम पद पर दावा ठोकते हैं। इसे आप कैसे देखते हैं?
दावा करना हर व्यक्ति का अधिकार है। मगर भाजपा में पार्लियामेंट्री बोर्ड है और हम सब उसके निर्देशानुसार ही काम करते हैं। दोनों हमारे वरिष्ठ नेता हैं और वह पार्टी के फैसलों को किस नजरिए से देखते हैं, यह उन पर निर्भर करता है। हमारे यहां पार्लियामेंट्री बोर्ड का ही अंतिम फैसला होता है। मुझे देख लीजिए। मेरी क्या औकात थी कि मैं मुख्यमंत्री बन जाऊं। मैं तो गरीब और पिछड़े परिवार का बेटा हूं। यह तो हमारे नेता मोदी जी, शाह जी, नड्डा जी और मनोहर लाल जी की सोच है कि गरीब परिवार के बेटे को भी आगे बढ़ाया जाए। मैं यह कभी नहीं सोचता हूं कि मैं मुख्यमंत्री बनकर बैठा हूं। मुझे तो पार्टी ने एक जिम्मेदारी दी है और मैं उस जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहा हूं।
पार्टी के कई कार्यकर्ता काफी मेहनत करते हैं और उनकी इच्छा होती है कि उन्हें भी चुनाव लड़ने का मौका मिले। मगर जिन्हें टिकट नहीं मिला वे बगावत पर उतार आए। कुछ की सीट बदली गई। ऐसा क्यों हुआ?
हर विधानसभा क्षेत्र में 15 से 20 लोगों ने टिकट के लिए आवेदन किया था और सभी ने काम किया है। मगर कमल का फूल सिर्फ एक है और एक को ही मिलेगा। बाकियों को समझौता करना होगा। पार्टी के सामने कई बार ऐसी परिस्थिति बनती है कि वह चाहकर भी अपने कार्यकर्ता को टिकट नहीं दे सकती। यह स्वाभाविक है कि जब टिकट दूसरे के पास जाता है तो गुस्सा आएगा, मगर मेहनती कार्यकर्ता कभी पार्टी से नाराज नहीं होगा। जो गए हैं, उनका व्यक्तिगत कारण हो सकता है।
इस बगावत का कितना असर पड़ेगा?
कांग्रेस में देखिए कितना द्वंद्व है। बापू-बेटा तो बात कर लेते होंगे बाकी मुझे नहीं लगता है कि आपस में कोई बातचीत करता होगा। उदयभान को देखिए। हुड्डा साहब उन्हें 24 घंटे साथ लेकर चलते हैं। सिर्फ दिखाने के लिए। जिस दिन उदयभान ने कह दिया कि उन्हें कोई बड़ा पद चाहिए (मुख्यमंत्री का) तो उनका भी हाल वही होगा, जो अशोक तंवर का हुआ था। हुड्डा साहब उदयभान का सिर्फ इस्तेमाल कर रहे हैं। मैंने उदयभान को एक दिन बोला भी था कि क्या आपको मिर्चपुर और गोहाना कांड नहीं दिखा। दलितों से इतना दुर्व्यवहार किया मगर आप कुछ नहीं बोलते।