मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने गेस्ट टीचरों की मांगों का समाधान करने का आश्वासन दिया है।
सीएम के साथ वीरवार को बातचीत करने चंडीगढ़ पहुंचे गेस्ट टीचरों के एक ग्रुप ने बैठक का बायकाट कर दिया। यह ग्रुप दिल्ली में आमरण अनशन पर बैठा है और इसी ग्रुप के गेस्ट टीचरों ने बुधवार को दिल्ली में मुख्यमंत्री का आवास घेरा था। तब उन्हें बातचीत का न्योता दिया गया था।
मुख्यमंत्री ने दूसरे गुट के अरुण मलिक और अन्य से बातचीत की। प्रदेश में करीब 16 हजार गेस्ट टीचर हैं।
बातचीत के बाद मलिक ने पत्रकारों से कहा कि उन्हें बैठक के लिए मुख्यमंत्री ने नहीं बुलाया था। वह स्वयं पता करने पहुंच गए थे।
बैठक में मुख्यमंत्री ने अनशन पर बैठे ग्रुप के प्रतिनिधियों से कहा कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की हुई है। कमेटी की रिपोर्ट आने दो, वे उनकी मांगों का समाधान करेंगे।
मलिक ने कहा कि जो गुट अनशन पर बैठा है, वह राजनीति कर रहा है। मुख्यमंत्री के आश्वासन पर उन्हें भरोसा करना चाहिए।
बैठक का बायकाट
उधर, दिल्ली से बातचीत करने पहुंचे गेस्ट टीचरों के प्रतिनिधिमंडल के सदस्य शशिभूषण ने बैठक का बायकाट करने के बाद पत्रकारों से कहा कि बुधवार को दिल्ली में मुख्यमंत्री के कर्यालय सचिव सूर्यदेव दहिया से भी कहा था कि सीएम से बातचीत सिर्फ उनके ग्रुप की होगी।
अगर, किसी अन्य व्यक्ति को बैठक में बुलाया गया, तो वे बातचीत नहीं करेंगे। शशिभूषण ने कहा कि वह वीरवार शाम साढ़े चार बजे सचिवालय पहुंच गए थे।
करीब सवा सात बजे वह बैठक में पहुंच गए। मुख्यमंत्री के प्रिंसिपल एडवाइजर एमएस चोपड़ा भी बैठक में थे। तभी अरुण मलिक और उनके साथ कुछ गेस्ट टीचर बैठक में पहुंच गए।
उन्हें देखते ही वह बैठक का बायकाट कर बाहर चले आए। उन्होंने कहा कि अरुण मलिक को प्रधान पद से दो महीने पहले हटा दिया गया था।
राजेंद्र शास्त्री उनके प्रधान हैं और दिल्ली में आमरण अनशन पर बैठे हैं। सरकार आंदोलन कर रहे गेस्ट टीचरों के संगठन के साथ बात करने के बजाय उस व्यक्ति से बात करना चाहती है तो करे।
उधर, राजेंद्र शास्त्री ने बताया कि गेस्ट टीचरों को पक्का किया जाए। जिस अरुण मलिक से सीएम बात कर रहे हैं, उसे गेस्ट टीचर अपना नेता ही नहीं मानते हैं। दिल्ली में उनका अनशन जारी रहेगा।