कैप्टन ने कहा कि मालगाड़ियों की आवाजाही रोकने से जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश जैसे अन्य राज्यों में जरूरी चीजों की आपूर्ति की सप्लाई बाधित हो सकती है। अगर बर्फबारी से पहले सेना तक जरूरी सप्लाई न पहुंचाई गई तो हमारी सेनाओं को दुश्मन से मात खाने में देर नहीं लगेगी।
चार-चार के समूह में जाएंगे राजघाट
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि दिल्ली में धारा 144 लागू होने के कारण विधायक पंजाब भवन से 4-4 के समूह में राष्ट्रपिता की समाधि की तरफ जाएंगे जबकि वे खुद पहले जत्थे का सुबह 10.30 बजे से नेतृत्व करेंगे। कैप्टन ने पंजाब की दूसरी पार्टियों के विधायकों से अपील की है कि राज्य के हितों को देखते हुए वे भी धरने में हिस्सा लें। पंजाब के प्रति केंद्र सरकार के सौतेले व्यवहार ने राज्य को गहरे संकट में धकेल दिया है।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने तीन बार लिखा पत्र
पंजाब के मुख्यमंत्री कार्यालय ने राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए तीन पत्र लिखे थे। इसके बावजूद राष्ट्रपति ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाले शिष्टमंडल से मुलाकात का समय नहीं दिया। मुख्यमंत्री कार्यालय ने 21 अक्तूबर को राष्ट्रपति भवन को पत्र भेजकर बैठक का समय मांगा था। 29 अक्तूबर को फिर से ज्ञापन भेजा गया। इसके जवाब में मुख्यमंत्री कार्यालय को बीते दिन प्राप्त हुए अर्ध सरकारी पत्र में बैठक के लिए की गई विनती को इस आधार पर रद्द कर दिया गया कि प्रांतीय संशोधन बिल अभी राज्यपाल के पास विचार के लिए लंबित पड़े हैं।
इसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय की तरफ से बीते दिन भेजे गए एक अन्य पत्र में कहा गया कि मुख्यमंत्री और अन्य विधायकों को मौजूदा स्थिति राष्ट्रपति के ध्यान में लाने और मसलों के हल के लिए मिलने का समय दिया जाए। इस पर राष्ट्रपति कार्यालय ने जवाब में कहा कि पहले कारणों के संदर्भ में इस समय पर यह विनती स्वीकार नहीं की जा सकती।
इस स्थिति पर चिंता जाहिर करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां तक प्रांतीय संशोधन विधेयक का संबंध है, सांविधानिक उपबंधों के मुताबिक राज्यपाल की भूमिका विधेयक आगे राष्ट्रपति को भेजे जाने तक ही सीमित है। उन्होंने कहा कि अकेला यह मुद्दा नहीं जिस पर राष्ट्रपति के दखल की जरूरत है।
केंद्रीय मंत्री भी नहीं मिले कांग्रेसी सांसदों से
मुख्यमंत्री ने पंजाब के कांग्रेसी सांसदों से दो केंद्रीय मंत्रियों के न मिलने पर गंभीर नोटिस लिया है। कांग्रेसी सांसदों ने रेलवे और वित्त मंत्रियों से मालगाड़ियों के निलंबन और जीएसटी के बकाए की अदायगी न होने के मामले पर विचार करने के लिए समय मांगा था।