उन्होंने कहा कि इससे राज्य को तेजी से औद्योगिक विकास का मार्ग प्रशस्त करने में मदद मिलेगी। इससे रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। राज्य के लिए चिह्नित पछवारा कोयला खदान से कोयले की पहली रैक आने का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वह दिन दूर नहीं, जब पंजाब देश में सरप्लस बिजली वाला अकेला राज्य बन जाएगा।
उन्होंने कहा कि धान के पिछले सीजन के दौरान पंजाब ने पिछले साल की तुलना में 83 प्रतिशत अधिक बिजली का उत्पादन किया। सीएम ने उम्मीद जताई कि पछवारा खदान से कोयले की आपूर्ति शुरू होने से बिजली उत्पादन कई गुना बढ़ जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पछवारा कोयला खदान राज्य को आवंटित की गई थी लेकिन 2015 से यह बंद पड़ी है।
उन्होंने कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है लेकिन पिछली सरकारों ने कोयले की आपूर्ति बहाल करने पर कोई ध्यान नहीं दिया। भगवंत मान ने कहा कि हमारी सरकार ने सत्ता में आते ही मार्च 2022 में इस मामले को उठाया और मामले का सही तरीके से पालन करते हुए कोयले की आपूर्ति बहाल कर दी गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोयले की आपूर्ति फिर से शुरू होने के साथ पीएसपीसीएल सालाना 600 करोड़, जबकि घरेलू कोयले पर पूर्ण निर्भरता से 520 करोड़ रुपये की और बचत होगी। इसके अलावा निजी कंपनियों को सरप्लस कोयले की आपूर्ति से 1,500 करोड़ रुपये और जुटाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पछवारा खदान के कोयले में राख की मात्रा मात्र 32 प्रतिशत है, जबकि अन्य स्रोतों से प्राप्त कोयले में 41 प्रतिशत राख है।