मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने कहा कि हरियाणा में अलग एसजीपीसी का गठन करके कांग्रेस सीधे रूप से सिखों के धार्मिक मामलों में दखल देने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस के इस कदम का सिख समाज की तरफ से धार्मिक और राजनीतिक मंच से कड़ा विरोध किया जाएगा। वे रविवार को फरीदकोट में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सिख समाज ने अनेकों शहादतें देकर ब्रिटिश सरकार से गुरुद्वारा एक्ट के तहत एसजीपीसी का गठन करवाया था।
आजादी के बाद पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू और मास्टर तारा सिंह के बीच हुए समझौते में भी गुरुद्वारा एक्ट में कोई बदलाव नहीं किया गया।
इस एक्ट में खुद एसजीपीसी भी तीन चौथाई बहुमत के बिना कोई संवैधानिक संशोधन नहीं कर सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि अपनी केंद्रीय हाईकमान की शह पर हरियाणा कांग्रेस के नेता बिना वजह सिखों के धार्मिक मामलों में दखल दे रहे हैं जबकि हरियाणा के सिखों ने कभी अलग कमेटी की मांग नहीं रखी है।
एसजीपीसी के पिछले चुनावों में शिअद ने हरियाणा की सभी 11 सीटों पर जीत हासिल की थी जबकि कांग्रेस के समर्थन वाले हारे हुए उम्मीदवार ही अलग कमेटी का राग अलाप रहे हैं।