सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने आरोप लगाया है कि अकालियों के इशारे पर केंद्र सरकार बारदाने की कमी पैदा कर रही है। ताकि गेहूं खरीद प्रक्रिया में रुकावट पैदा कर कांग्रेस सरकार को बदनाम किया जा सके।
सीएम ने कहा कि सूबे में गेहूं की बंपर पैदावार हुई है, पर इसे बारदाने से वंचित रखा जा रहा है। जबकि, हरियाणा में 12 मई को मतदान केमद्देनजर बारदानें की अतिरिक्त सप्लाई दी जा रही है। पंजाब से चार लाख बोरियां (16000 गांठें) हरियाणा को भेजी जा चुकी हैं। केंद्र सरकार की राजनीति के चलते कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद पहली बार खरीद प्रक्रिया प्रभावित हुई है। भाजपा की केंद्र सरकार अपने सहयोगी अकाली दल के इशारे पर काम कर रही है।
जिससे मंडियों में खरीद में रुकावट डाली जा सके। दूसरी तरफ हरियाणा को फालतू बारदाना दिया जा रहा है। चुनावी साल में राजनीतिक हित साधने के लिए केंद्र सरकार ने एक बार फिर पंजाब के साथ सौतेला बर्ताव किया है। हालात और बिगाड़ने केलिए हरियाणा से गेहूं पंजाब में धकेला जा रहा है। भाजपा को वोटों केलिए ऐसा घटिया हथकंडे अपनाने से बाज आना चाहिए। सीएम ने कहा कि पंजाब सरकार ने बार-बार बारदाने का मुद्दा केंद्र से उठाया। उन्होंने खुद एफसीआई के प्रमुख डीवी प्रसाद से बात की।
प्रमुख सचिव केएपी सिन्हा ने शनिवार को केंद्रीय सचिव को पत्र लिख कर सूचित किया था कि अगर बारदाने की कमी जा रही तो सूबे में कानून-व्यवस्था की समस्या खड़ी हो सकती है। सीएम ने बताया कि तीन मई तक मंडियों में 105.4 लाख टन गेहूं पहुंचा है। छह मई तक 15-16 लाख टन और पहुंचने की उम्मीद है। बठिंडा, मानसा, फाजिल्का, फिरोजपुर, मुक्तसर, होशियारपुर, अमृतसर, तरनतारन, गुरदासपुर में ए-क्लास गांठों की कमी है। सिन्हा ने अपील की थी कि इसे देखते हुए पंजाब को बी-क्लास गांठें खुले बाजार से खरीदने की इजाजत दी जाए। गौरतलब है कि हरियाणा को बी-क्लास बारदाना प्रयोग करने की इजाजत दी गई है, पर पंजाब को मना कर दिया गया।