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पंजाब में फिर खोले जाएंगे बंद धर्मल प्लांट, बिजली की मांग पर सरकार ने लिया फैसला

Wed, 08 Aug 2018 09:47 AM IST
हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
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सांकेतिक तस्वीर
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 पंजाब में आगामी खरीफ सीजन में बिजली की मांग बढ़ने की संभावनाओं को देखते हुए राज्य सरकार ने इस साल जनवरी में बंद किए गए रोपड़ थर्मल प्लांट की दो इकाईयों में फिर से बिजली उत्पादन शुरू करने का फैसला किया है। राज्य सरकार ने यह फैसला सूबे में बिजली की मौजूदा 12500 मेगावाट की मांग को देखते हुए लिया है। 
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सरकार का मानना है कि अगर यह मांग 13000 मेगावाट का आंकड़ा छू लेती है तो खरीफ सीजन में बढ़ने वाली बिजली की मांग परेशानी का कारण बन सकती है। 

इसी दौरान सूबे के बिजली मंत्री ने सरकारी विभागों पर बकाया बिजली बिलों के भुगतान को लेकर भी तैयारी शुरू कर दी है और इसी हफ्ते चंडीगढ़ में उन सभी विभाग प्रमुखों की बैठक बुला ली है, जिन्होंने बिजली बिलों का भुगतान नहीं किया है। खास बात यह है कि सरकारी विभागों पर बिजली बिलों के करीब 1200 करोड़ रुपये बकाया हैं।

जानकारी के अनुसार, राज्य में इस समय बिजली का जितना उत्पादन हो रहा है, उससे न सिर्फ सूबे की मौजूदा जरूरत आसानी से पूरी हो रही है बल्कि पीएसपीसीएल ने जिन बाहरी राज्यों को बिजली बेचने के करार कर रखे हैं, उनकी मांग भी पूरी की जा रही है। राज्य के कुल बिजली उत्पादन में से 12059 मेगावाट की खपत तो राज्य में ही हो जाती है जबकि बाकी बिजली अन्य राज्यों को बेची जा रही है।
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 इनमें सात लाख यूनिट बिजली पीक आवर में 6.78 रुपये प्रति यूनिट की दर से भी बेची जा रही है। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने इस साल जनवरी में रोपड़ थर्मल प्लांट के दो और बठिंडा प्लांट के चार यूनिटों को यह कहते हुए बंद करने का फैसला लिया था कि यह यूनिट पुराने हो चुके हैं और इनमें बिजली की उत्पादन लागत भी बहुत बढ़ गई है। इसके अलावा राज्य को इन यूनिटों में बिजली उत्पादन के लिए पर्याप्त कोयला भी नहीं मिल रहा।

इस संबंध में बिजली मंत्री गुरप्रीत सिंह कांगड़ का कहना है कि बिजली की मांग बढ़ने की संभावना के चलते पीएसपीसीएल ने तैयारी शुरू कर दी है। अगर बिजली की मौजूदा मांग 13000 मेगावाट को पार कर गई तो रोपड़ प्लांट के दो यूनिटों को फिर से चालू किया जाएगा। उन्होंने कहा के रोपड़ की दोनों यूनिट शुरू करने में ज्यादा कठिनाई नहीं आएगी। हालांकि बठिंडा की यूनिटें चालू करने का फैसला लिया गया तो मुश्किल यह होगी कि वहां कोयला का प्रबंध करना पड़ेगा और भट्टियों को गरम होने में भी कई दिन लगेंगे। 
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