पंजाब के मुख्यमंत्री के चीफ प्रिंसिपल सेक्रेटरी सुरेश कुमार के कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ मुलाकात के बाद सारे गिले-शिकवे दूर हो गए और इस्तीफे का घटनाक्रम भी समाप्त हो गया। वीरवार को इस पूरे घटनाक्रम की असल वजह को लेकर कई चर्चाएं चलती रहीं कि आखिर सुरेश कुमार ने इस्तीफा क्यों दिया और किस आश्वासन पर उन्होंने इस्तीफा वापस ले लिया? सीएमओ के सूत्रों के अनुसार, सुरेश कुमार के इस्तीफे की मुख्य वजह कुछ मंत्रियों के साथ मतभेद रही।
पता चला है कि चार कैबिनेट मंत्रियों के विभागों में फेरबदल करने की तैयारी चल रही थी और इसका खाका तैयार करने में सुरेश कुमार अहम भूमिका में थे। मुख्यमंत्री के सबसे विश्वस्त अधिकारी होने के नाते सुरेश कुमार पहले भी सरकार की नीतियों के निर्माण और उनके कार्यान्वयन पर काम करते रहे हैं। लेकिन उक्त चार मंत्रियों को जब इस बारे में पता चला कि उनके विभागों में फेरबदल का खाका तैयार किया गया है, तो वे नाराज हो गए।
उनकी इसी नाराजगी को देखते हुए सुरेश कुमार ने हाथ खड़े कर दिए कि वे काम ही नहीं करेंगे। माना जा रहा है कि सुरेश कुमार को इस्तीफे के बाद जब कैप्टन ने मिलने के लिए बुलाया तो विभाग बदले जाने वाले मंत्रियों में से दो मंत्री इस बैठक में भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने सारी स्थिति को संभाला और यह मामला रफा-दफा कराया। दूसरी ओर, यह भी चर्चा है कि सुरेश कुमार हाईकोर्ट में लंबित अपने केस पर एडवोकेट जनरल के रवैये से खफा चल रहे थे।
दरअसल सुरेश कुमार के केस पर गत 24 फरवरी को हाईकोर्ट में सुनवाई थी और एजी अतुल नंदा ने खुद अदालत में पेश होने के बजाय अतिरिक्त एजी अनु चतरथ को भेज दिया, जिन्होंने अदालत से और समय मांग लिया। इसके बाद इस केस पर 18 मई की तारीख मिली, जो अदालत द्वारा आगामी 14 सितंबर तक टल गई है। कहा जा रहा है कि अपने केस के बारे में एजी के रवैये से नाराज होकर सुरेश कुमार ने अपने पद पर कामकाज से हाथ खींच लिया।